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सरकार का बड़ा फैसला, नवी मुंबई एयरपोर्ट के जरिए दवाओं के आयात को मिली मंजूरी

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने महाराष्ट्र में हाल ही में शुरू हुए नवी मुंबई एयरपोर्ट के जरिए दवाओं के आयात की मंजूरी दे दी है। इससे दवा की खेप के लिए तय एंट्री पॉइंट्स की संख्या में इजाफा हुआ है। यह जानकारी आधिकारिक बयान में बुधवार को दी गई।

सरकार का बड़ा फैसला, नवी मुंबई एयरपोर्ट के जरिए दवाओं के आयात को मिली मंजूरी
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नई दिल्ली। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने महाराष्ट्र में हाल ही में शुरू हुए नवी मुंबई एयरपोर्ट के जरिए दवाओं के आयात की मंजूरी दे दी है। इससे दवा की खेप के लिए तय एंट्री पॉइंट्स की संख्या में इजाफा हुआ है। यह जानकारी आधिकारिक बयान में बुधवार को दी गई।

ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 43ए में संशोधन करके नवी मुंबई को उन एयरपोर्ट्स की लिस्ट में शामिल किया गया है जहां से दवाएं आयात की जा सकती हैं। यह कदम दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि यह नोटिफिकेशन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के प्रावधानों के तहत ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से सुझाव के बाद जारी किया गया है।

बयान में कहा गया, "इस संशोधन से फार्मास्युटिकल कंसाइनमेंट की आवाजाही आसान होने, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने और भारत में दवाओं के आयात के लिए एक नया विकल्प मिलने से आयातकों को ज्यादा सुविधा मिलने की उम्मीद है।"

मंत्रालय ने कहा कि यह पहल नियामक ढांचे को मजबूत करने, व्यापार को आसान बनाने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयात की गई दवाओं पर प्रभावी रेगुलेटरी निगरानी सुनिश्चित करने की सरकार की लगातार कोशिशों के अनुरूप है।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जून में ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव दिया था ताकि जांच, टेस्ट या एनालिसिस के लिए दवाओं के आयात की मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके, जिसे आमतौर पर 'फॉर्म 11' के जरिए किया जाता है।

यह संशोधन एनालिटिकल और नॉन-क्लिनिकल टेस्टिंग के मकसद से कम मात्रा में सभी दवाओं के आयात के लिए एक स्वीकृति-आधारित सिस्टम शुरू करता है।

बयान में कहा गया है कि इस संशोधन से टेस्टिंग या आरएंडडी के मकसद से कम मात्रा में दवाओं के आयात के लिए लाइसेंसिंग की जरूरतें खत्म हो जाएंगी, जिससे आवेदकों पर नियमों का पालन करने का बोझ काफी कम होने की उम्मीद है।

इस कदम से फार्मास्युटिकल सेक्टर में कारोबार में आसानी को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही रिसर्च और इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्टार्ट-अप्स और इंडस्ट्रीज तेजी से टेस्टिंग या एनालिसिस शुरू कर पाएंगी।



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