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JAL अधिग्रहण मामला: सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका, अदाणी की ₹14535 करोड़ की बोली पर नहीं लगाई रोक

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं लेगी।

JAL अधिग्रहण मामला: सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका, अदाणी की ₹14535 करोड़ की बोली पर नहीं लगाई रोक
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नई दिल्‍ली: भारत के कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़े एक बड़े कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं, जिससे आगे की प्रक्रिया पर करीबी निगरानी बनी रहे।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं लेगी। यह निर्देश इस बात को सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कदम न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर न हो।

पक्षकारों को NCLAT जाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों खासतौर पर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज को अपनी दलीलें NCLAT के समक्ष रखने को कहा है। अदालत ने NCLAT को भी निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे। जानकारी के अनुसार, इस विवाद पर NCLAT में 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू होने जा रही है। इससे साफ है कि सुप्रीम कोर्ट फिलहाल मामले में सीधा हस्तक्षेप करने के बजाय प्रक्रिया को निचली अपीलीय संस्था के जरिए आगे बढ़ाना चाहता है।

विवाद की पृष्ठभूमि: वेदांता की चुनौती

यह पूरा विवाद तब सामने आया जब वेदांता लिमिटेड ने NCLAT के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें अदाणी ग्रुप की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।

घटनाक्रम इस प्रकार रहा:

24 मार्च: NCLAT ने अदाणी की बोली पर रोक लगाने से इनकार किया
25 मार्च: वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की
NCLAT ने कर्जदाताओं की समिति (CoC) से जवाब मांगा

वेदांता का तर्क है कि अधिग्रहण प्रक्रिया में कई कानूनी खामियां हैं, जिनकी गहन समीक्षा जरूरी है।

अधिग्रहण की प्रक्रिया: कैसे आगे बढ़ा मामला

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) वर्तमान में दिवाला प्रक्रिया (Insolvency) से गुजर रही है। इसके अधिग्रहण के लिए कई बड़ी कंपनियां दौड़ में शामिल थीं। लंबी प्रक्रिया के बाद नवंबर में कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने अदाणी एंटरप्राइजेज की ₹14,535 करोड़ की रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी इस योजना को हरी झंडी दे दी, जिससे अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ हो गया। हालांकि, वेदांता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग अपीलें दायर कीं।

वेदांता के मुख्य आपत्ति बिंदु

वेदांता ने अपनी अपील में दो प्रमुख मुद्दे उठाए हैं:
रेजोल्यूशन प्लान की वैधता – कंपनी का कहना है कि अदाणी की योजना नियमों के अनुरूप नहीं है।
CoC और NCLT की मंजूरी पर सवाल – वेदांता का आरोप है कि मंजूरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी रही।

इन आपत्तियों के आधार पर वेदांता ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

NCLAT पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले का भविष्य NCLAT में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अदाणी ग्रुप की बोली फिलहाल प्रभावी बनी रहेगी, अंतिम निर्णय NCLAT द्वारा ही लिया जाएगा। 10 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क पेश करेंगे, जिसके बाद अधिग्रहण पर अंतिम फैसला सामने आएगा।

कॉरपोरेट सेक्टर पर असर

यह मामला केवल एक कंपनी के अधिग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत होने वाली प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से भी जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस का फैसला भविष्य में बड़े कॉरपोरेट अधिग्रहणों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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