भारत और ऑस्ट्रेलिया ने पीएसीटीएस लॉन्च किया, साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर गुरुवार को पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी एंड सप्लाई चेन (पीएसीटीएस) को लॉन्च किया। इसका उद्देश्य साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाना है।

नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर गुरुवार को पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी एंड सप्लाई चेन (पीएसीटीएस) को लॉन्च किया। इसका उद्देश्य साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाना है।
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, "पीएसीटीएस का मकसद राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा में हमारे साझा हितों का समर्थन करना, हमारे सहयोगियों को अधिक डिजिटल विकल्प देकर सशक्त बनाना, अहम सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाना और ग्लोबल साइबर क्षमता को मजबूत करना है।"
पीएसीटीएस पांच आपस में जुड़े हुए स्तंभों पर एक साझा रणनीतिक विजन के साथ आगे बढ़ेगा, इनमें सप्लाई चेन की मजबूती और विविधता, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल मजबूती और डिफेंस रिसर्च में सहयोग शामिल है।
मंत्रालय ने कहा कि इनमें से हर स्तंभ के तहत, भारत और ऑस्ट्रेलिया प्राइवेट सेक्टर, यूनिवर्सिटीज, रिसर्च संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मौकों और खास प्रोजेक्ट्स की पहचान करेंगे।
बयान में कहा गया, "ऑस्ट्रेलिया और भारत मिलकर दोनों देशों के बढ़ते तकनीकी उद्योगों को सहारा देने के लिए सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम करेंगे। इसमें सुरक्षा से जुड़े नियमों को बढ़ावा देना, साथ ही नियमों पर आधारित द्विपक्षीय टेक्नोलॉजी व्यापार और सप्लाई चेन को मजबूत करना शामिल है।"
इसमें सेमीकंडक्टर और जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन – जिसमें रीसाइक्लिंग और रिकवरी भी शामिल है – पर मिलकर काम किया जाएगा। साथ ही, ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय व्यवसायों के बीच कमर्शियल सहयोग और व्यापार में विविधता लाने को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
पीएसीटीएस लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित, आम सहमति वाले और कई पक्षों को शामिल करने वाले फ्रेमवर्क विकसित करके भरोसेमंद और सुरक्षित एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और बेंचमार्क को आगे बढ़ाने की वैश्विक कोशिशों का लाभ उठाएगा।
बयान में कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया और भारत, मल्टी-डोमेन रक्षा चुनौतियों और क्षमताओं की साझा समझ को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा अनुसंधान साझेदारियों का लाभ उठाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।


