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कच्चे तेल में तेजी और वैश्विक अस्थिरता से सोना और चांदी फिसले

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखी गई। इसकी वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर ताजा हमले के बाद वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ना और कच्चे तेल में फिर से तेजी आना है।

कच्चे तेल में तेजी और वैश्विक अस्थिरता से सोना और चांदी फिसले
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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखी गई। इसकी वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर ताजा हमले के बाद वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ना और कच्चे तेल में फिर से तेजी आना है।

दोपहर 12 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर में सोने का दाम 1.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,379 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि कॉमेक्स पर जून फ्यूचर्स के सोने का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,376 डॉलर पर था।

सोने की अपेक्षा चांदी में अधिक गिरावट देखी गई। हाजिर में चांदी का दाम 2.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72.92 डॉलर प्रति औंस पर था। कॉमेक्स पर चांदी का जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72.93 डॉलर प्रति औंस पर था।

भारतीय बाजार बकरीद ईद की छुट्टी के चलते बंद है।

कमोडिटी बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण निवेशकों के सतर्क रहने से सोने पर दबाव बना रहा।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच प्रमुख विवाद के मुद्दों में ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखने और अपने परमाणु कार्यक्रम को संरक्षित करने की मांग शामिल है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन ईरान की इन दोनों मांगों को नहीं मानेगा।

जानकारों का मुताबिक, "ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो रही हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता, तेल की ऊंची कीमतें और डॉलर की मजबूती के कारण कीमती धातुओं की कीमतों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है, और वर्तमान में सोना संघर्ष शुरू होने के समय के स्तर से 15 प्रतिशत से अधिक नीचे कारोबार कर रहा है।

इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा कथित तौर पर वाशिंगटन की सैन्य कार्रवाई के जवाब में एक अमेरिकी हवाई अड्डे को निशाना बनाने के दावे के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे आपूर्ति में व्यवधान और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं।



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