वैश्विक तनावों के चलते बाजार लगातार दूसरे दिन धड़ाम, सेंसेक्स 555 अंक टूटा, निफ्टी में 0.61 प्रतिशत की गिरावट
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
एनएसई निफ्टी 50 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,635.10 पर बंद हुआ, तो वहीं बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत लुढ़ककर 75,577 पर पहुंच गया।
प्रमुख बेंचमार्कों में कमजोरी के बावजूद व्यापक बाजारों में तेजी देखी गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत तो निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑयल एंड गैस और प्राइवेट बैंक इंडेक्स सबसे अधिक नुकसान में रहे। निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर, एफएमसी और मीडिया इंडेक्स लाभ में रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.98 प्रतिशत की गिरावट) और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.93 प्रतिशत की गिरावट) सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। इसके अलावा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी आईटी में भी गिरावट देखने को मिली। वहीं इसके विपरीत, निफ्टी मीडिया (1.31 प्रतिशत की तेजी), निफ्टी फार्मा (0.77 प्रतिशत की तेजी) और निफ्टी हेल्थकेयर (0.63 प्रतिशत की तेजी) ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल्स में भी तेजी दर्ज की गई।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि अप्रैल में मिड-कैप और मार्च में स्मॉल-कैप के लिए 52-हफ्ते के निचले स्तर दर्ज किए जाने के बाद से इन सेगमेंट ने 20-30 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न दिया है।
यह तेजी घरेलू निवेश में सुधार और 'वैल्यू बाइंग' (कम कीमत पर अच्छे शेयर खरीदना) की वजह से आई। 2025 में ग्लोबल आर्थिक मंदी, ज्यादा महंगाई और ट्रेड टैरिफ जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कमाई में कमी की चिंताएं कम हुईं।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि पहली तिमाही (क्यू1) के नतीजों से कॉर्पोरेट कमाई में सुधार के संकेत मिले, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के कारण इस उम्मीद को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि चुनिंदा शेयरों की खरीदारी जारी रहेगी, लेकिन बाजार में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए थोड़ा मुनाफा बुक करना समझदारी होगी।
पिछले पांच-छह महीनों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने जो शानदार प्रदर्शन किया है, उसे आगे भी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
एक्सपर्ट ने बताया कि रणनीतिक नजरिए से लार्ज-कैप शेयरों और नॉन-इक्विटी ईटीएफ पर ज्यादा ध्यान देना ज्यादा सुरक्षित लगता है। वहीं सेक्टर के हिसाब से देखें तो हेल्थकेयर, टेलीकॉम, एफएमसीजी, डाइवर्सिफाइड बिजनेस और आईटी जैसे डिफेंसिव और 'डीप-वैल्यू' वाले सेक्टर पोर्टफोलियो को फायदा पहुंचा सकते हैं।


