भारत, पाकिस्तान या चीन… ईरान जंग से सबसे ज्यादा नुकसान किसे हुआ?
IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। इसका असर केवल युद्ध प्रभावित क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

न्यूयार्क। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े मिडिल ईस्ट संघर्ष ने दुनिया की आर्थिक रफ्तार को धीमा कर दिया है। साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया गया है, जो पहले 3.4% था। IMF ने चेतावनी दी है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो यह दर 2% तक गिर सकती है और वैश्विक महंगाई 6% तक पहुंच सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका
IMF के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। इसका असर केवल युद्ध प्रभावित क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। खासतौर पर तेल और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
तेल की सप्लाई प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में व्यवधान और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने लगभग हर देश में महंगाई को बढ़ावा दिया है, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति कमजोर हुई है।
अमेरिका पर मंदी की आशंका
अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। पेट्रोल और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने वहां मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है। IMF के अनुसार, 2026 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2.3% रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से 0.1% कम है। हालांकि 2027 के लिए 2.1% की ग्रोथ का अनुमान कुछ हद तक स्थिरता का संकेत देता है।
ब्रिटेन पर सबसे ज्यादा असर
G7 देशों में सबसे ज्यादा प्रभावित ब्रिटेन हुआ है। IMF ने ब्रिटेन की 2026 की विकास दर में 0.5% की कटौती करते हुए इसे 0.8% कर दिया है। 2027 के लिए 1.3% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। वहीं, सऊदी अरब को भी इस संकट का बड़ा झटका लगा है। उसकी 2026 की ग्रोथ दर में 1.4% की कमी की गई है, जिससे यह अब 3.1% रहने की संभावना है। हालांकि 2027 में इसमें सुधार होकर 4.5% तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
चीन और कनाडा पर भी असर
चीन और कनाडा जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर भी इसका असर पड़ा है। दोनों देशों की 2026 की विकास दर के अनुमान में 0.1% की कटौती की गई है। हालांकि 2027 के लिए इनके अनुमानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में स्थिति स्थिर रह सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत
इसके विपरीत, भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। IMF ने भारत के विकास अनुमानों में मामूली सुधार किया है। 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.6% रहने का अनुमान है, जबकि 2026 और 2027 में यह 6.5% के आसपास रह सकती है। यह संकेत देता है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की घरेलू मांग और आर्थिक संरचना उसे सहारा दे रही है।
पाकिस्तान के लिए भी राहत
पाकिस्तान के लिए भी IMF की रिपोर्ट कुछ राहत भरी है। 2026 और 2027 के विकास अनुमानों में क्रमशः 0.4% और 0.6% की बढ़ोतरी की गई है। 2025 में पाकिस्तान की ग्रोथ 3.89% रहने की संभावना है, जबकि 2026 में 3.6% और 2027 में 3.5% तक रहने का अनुमान है। ब्राजील और रूस के लिए भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। दोनों देशों की विकास दर के अनुमानों में 0.3% की बढ़ोतरी की गई है, जो उनके आर्थिक प्रदर्शन में सुधार की ओर इशारा करता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को अधिक नुकसान
IMF ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि आगे की स्थिति काफी हद तक मिडिल ईस्ट के हालात पर निर्भर करेगी। यदि युद्ध लंबा खिंचता है या अन्य क्षेत्रों में फैलता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, बढ़ता वैश्विक कर्ज, भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितता भी जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, कुछ सकारात्मक संभावनाएं भी मौजूद हैं। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से उत्पादकता में वृद्धि होती है या देशों के बीच व्यापारिक संबंध बेहतर होते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट की स्थिति और उसके आर्थिक प्रभावों पर टिकी हुई हैं।


