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सीसीपीए की स्पाइसजेट पर बड़ी कार्रवाई, बुकिंग प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न अपनाने पर लगाया 1 लाख रुपए का जुर्माना

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) ने शुक्रवार को स्पाइसजेट लिमिटेड पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। एयरलाइन पर आरोप है कि उसने अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' यानी भ्रामक डिजाइन तकनीकों का इस्तेमाल किया। इसके तहत ग्राहकों को उनकी जानकारी या स्पष्ट सहमति के बिना स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में स्वतः शामिल किया जा रहा था और प्रमोशनल संदेश भेजने की सहमति भी पहले से चयनित (प्री-सेलेक्टेड) विकल्पों के जरिए ली जा रही थी।

सीसीपीए की स्पाइसजेट पर बड़ी कार्रवाई, बुकिंग प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न अपनाने पर लगाया 1 लाख रुपए का जुर्माना
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नई दिल्ली। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) ने शुक्रवार को स्पाइसजेट लिमिटेड पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। एयरलाइन पर आरोप है कि उसने अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' यानी भ्रामक डिजाइन तकनीकों का इस्तेमाल किया। इसके तहत ग्राहकों को उनकी जानकारी या स्पष्ट सहमति के बिना स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में स्वतः शामिल किया जा रहा था और प्रमोशनल संदेश भेजने की सहमति भी पहले से चयनित (प्री-सेलेक्टेड) विकल्पों के जरिए ली जा रही थी।

यह आदेश सीसीपीए की चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। जांच में पाया गया कि एयरलाइन के ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ऐसे इंटरफेस डिजाइन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद प्रभावित होती है और यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा, "चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली सीसीपीए ने स्पाइसजेट लिमिटेड पर अपने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' जैसी भ्रामक डिजाइन तकनीकों का इस्तेमाल करने के लिए 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।"

सीसीपीए के अनुसार, बुकिंग प्रक्रिया के दौरान पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स के जरिए ग्राहकों को स्वतः स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम का सदस्य बना दिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि प्रमोशनल संदेश प्राप्त करने का विकल्प भी पहले से चयनित रहता था। ऐसे में उपभोक्ता की ओर से कोई अलग कार्रवाई किए बिना ही यह मान लिया जाता था कि उसने टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से प्रचार संबंधी संदेश प्राप्त करने की सहमति दे दी है।

नियामक ने यह भी पाया कि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी स्पाइसजेट ने पुरानी व्यवस्था हटाकर एक नया प्री-टिक्ड चेकबॉक्स जोड़ दिया, जिसके जरिए भविष्य में एसएमएस, व्हाट्सऐप और ईमेल से संदेश भेजने की सहमति पहले से ही दर्ज रहती थी। यानी कंपनी ने उसी प्रक्रिया को दूसरे तरीके से जारी रखा।

सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने इस मामले को तकनीकी त्रुटि बताया, जिसके बाद कंपनी को यह लिखित आश्वासन देने का निर्देश दिया गया कि आवश्यक सुधारात्मक कदम लागू कर दिए गए हैं और उन्हें भविष्य में भी स्थायी रूप से बनाए रखा जाएगा।

मंत्रालय ने कहा, "सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने बताया कि यह समस्या तकनीकी त्रुटि के कारण हुई थी। कंपनी को यह आश्वासन देने के लिए कहा गया कि आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं और उन्हें स्थायी रूप से लागू रखा जाएगा।"

सीसीपीए ने कहा कि इस तरह की प्रथाएं उपभोक्ताओं की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती हैं, उन्हें पूरी जानकारी के आधार पर फैसला लेने से रोकती हैं और निष्पक्ष एवं पारदर्शी उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

प्राधिकरण ने यह भी माना कि एयरलाइन का यह आचरण कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक प्रथा (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस), अनुचित अनुबंध (अनफेयर कॉन्ट्रैक्ट) और भ्रामक प्रस्तुतीकरण (मिसलीडिंग रिप्रेजेंटेशन) की श्रेणी में आता है।



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