सोना-चांदी खरीदना अब महंगा होगा! सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% किया
सरकार के नए फैसले के बाद सोने पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी 5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है। इसके अलावा 5% कृषि सेस पहले की तरह लागू रहेगा। इस तरह सोने पर कुल प्रभावी आयात शुल्क अब 15% हो गया है, जबकि पहले यह केवल 6% था।

नई दिल्ली: Gold Import Duty: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोगों से कुछ समय तक सोना न खरीदने की अपील के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। सरकार ने सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 10% कर दी है। कृषि सेस जोड़ने के बाद अब सोने पर कुल प्रभावी आयात शुल्क 15% हो गया है। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार को कई अधिसूचनाएं जारी कीं और नई दरें 13 मई से लागू कर दी गई हैं। सरकार का मानना है कि इस फैसले से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा, व्यापार घाटा नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और रुपये को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ ही बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आने की संभावना भी बढ़ गई है।
क्या है नया इंपोर्ट ड्यूटी स्ट्रक्चर?
सरकार के नए फैसले के बाद सोने पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी 5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है। इसके अलावा 5% कृषि सेस पहले की तरह लागू रहेगा। इस तरह सोने पर कुल प्रभावी आयात शुल्क अब 15% हो गया है, जबकि पहले यह केवल 6% था। चांदी और दूसरी कीमती धातुओं पर भी इसी तरह शुल्क बढ़ाया गया है। सरकार का उद्देश्य विदेशी खरीद को कम करना और देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा पर नियंत्रण रखना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश सोना विदेशों से आयात किया जाता है। ऐसे में जब सोने की कीमतें बढ़ती हैं और आयात ज्यादा होता है, तब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ जाता है। सरकार का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ाने से सोने की मांग में कमी आएगी। इससे डॉलर की मांग भी घटेगी और रुपये पर दबाव कम होगा। इसके अलावा व्यापार घाटा कम करने में भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार फिलहाल विदेशी मुद्रा की बचत और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने पर जोर दे रही है। इसी रणनीति के तहत यह फैसला लिया गया है।
जल्द महंगा हो सकता है सोना
आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ेगा। भारत में बिकने वाला अधिकांश सोना आयात किया जाता है, इसलिए टैक्स बढ़ते ही इसकी लागत बढ़ जाएगी। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, पहले से रिकॉर्ड स्तर पर चल रही सोने और चांदी की कीमतों में अब और तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई ड्यूटी के कारण मांग प्रभावित हो सकती है, क्योंकि आम उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना और महंगा हो जाएगा। ज्वैलरी कारोबार से जुड़े व्यापारियों का भी मानना है कि शादी और त्योहारों के सीजन में इसका असर साफ दिखाई देगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था में सोने की बड़ी भूमिका
भारत में हर साल औसतन 600 से 800 टन तक सोने की मांग रहती है। वर्ष 2025 में देश में करीब 710.9 टन सोने की खपत दर्ज की गई थी। हालांकि 2026 की पहली तिमाही में मांग घटकर 151 टन रह गई। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर भारतीय लोग कुछ समय तक सोने की खरीद कम कर दें, तो इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। सोने का आयात कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश का पैसा घरेलू निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
एक साल तक सोना न खरीदें तो कितनी बचत?
भारत में सोने के आयात पर हर साल लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में सोने के आयात पर करीब 4.89 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 6.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी अवधि में देश का व्यापार घाटा भी बढ़कर 310.60 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 261.80 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि लोग एक साल तक सोने की खरीद काफी हद तक कम कर दें, तो देश करीब 6.40 लाख करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। वहीं, अगर सोने की मांग इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो 2026-27 में आयात बिल बढ़कर 8.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
तस्करी बढ़ने का खतरा
हालांकि सरकार के इस फैसले को लेकर चिंता भी जताई जा रही है। बुलियन मार्केट और धातु उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि ऊंची आयात ड्यूटी के कारण सोने की तस्करी फिर बढ़ सकती है। जानकारों का कहना है कि जब आयात शुल्क ज्यादा होता है, तब अवैध तरीके से सोना लाने वालों को अधिक मुनाफा मिलता है। मुंबई के एक बुलियन डीलर के मुताबिक मौजूदा कीमतों पर तस्करों के लिए अवैध कारोबार काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में सरकार द्वारा आयात शुल्क घटाने के बाद सोने की तस्करी में कमी देखी गई थी। अब ड्यूटी बढ़ने के बाद फिर से अवैध कारोबार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


