अदाणी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट्स ने ब्रिटेन के लीलाक के साथ की बड़ी साझेदारी, गुजरात के कच्छ में बनाएंगी वाणिज्यिक स्तर के लो-कार्बन सीमेंट
अदाणी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट्स ने सोमवार को घोषणा की कि उसने ब्रिटेन स्थित स्वच्छ प्रौद्योगिकी कंपनी लीलाक लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत दोनों कंपनियां गुजरात के कच्छ जिले के सांघीपुरम में दुनिया के सबसे बड़े वाणिज्यिक स्तर के कम-कार्बन सीमेंट उत्पादन मार्गों में से एक विकसित करेंगी।

अहमदाबाद। अदाणी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट्स ने सोमवार को घोषणा की कि उसने ब्रिटेन स्थित स्वच्छ प्रौद्योगिकी कंपनी लीलाक लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत दोनों कंपनियां गुजरात के कच्छ जिले के सांघीपुरम में दुनिया के सबसे बड़े वाणिज्यिक स्तर के कम-कार्बन सीमेंट उत्पादन मार्गों में से एक विकसित करेंगी।
अदाणी समूह की कंपनी ने बताया कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो इसे 7 से 8 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इससे हर साल 10 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर किया जा सकेगा, जो भारत ही नहीं, दुनिया भर में कम-कार्बन सीमेंट उत्पादन के लिए एक प्रभावी और बड़े स्तर पर अपनाए जा सकने वाला मॉडल तैयार कर सकता है।
अंबुजा सीमेंट्स के निदेशक करण अदाणी ने कहा कि सीमेंट उद्योग को कम-कार्बन भविष्य की ओर ले जाने के लिए साहसिक सोच, तकनीकी नवाचार और पूरी वैल्यू चेन के सहयोग की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा, "लीलाक के साथ हमारी साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि हम ऐसी नई तकनीकों का मूल्यांकन कर रहे हैं जो उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले उत्सर्जन को कम कर सकें, ऊर्जा दक्षता बढ़ा सकें और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास को समर्थन दे सकें।"
करण अदाणी ने आगे कहा कि यह पहल भविष्य के लिए विश्वस्तरीय विनिर्माण सुविधाएं विकसित करने की हमारी सोच के अनुरूप है।
यह साझेदारी अंबुजा सीमेंट्स की व्यापक डीकार्बोनाइजेशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वर्ष 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के उसके लक्ष्य को समर्थन देती है, जिसे साइंस बेस्ड टार्गेट्स इनिशिएटिव (एसबीटीआई) से भी मान्यता मिली हुई है।
सांघीपुरम स्थित अंबुजा सीमेंट्स के 6.6 एमटीपीए क्षमता वाले सांघी प्लांट में यह वाणिज्यिक प्रदर्शन परियोजना शुरू की जाएगी, जिसमें लीलाक की कार्बन कैप्चर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक हीटिंग तकनीक को शामिल कर कम उत्सर्जन वाले सीमेंट उत्पादन की संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा।
कंपनी के अनुसार, यह तकनीक नवीकरणीय बिजली के अधिक उपयोग और उत्पादन प्रक्रिया से निकलने वाली अनिवार्य कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर करने में मदद करेगी।
यह तकनीक ऐसी व्यवस्था विकसित करने के लिए बनाई गई है जिसमें कोयले की खपत को पूरी तरह शून्य तक लाया जा सकेगा। साथ ही वैकल्पिक ईंधनों का भी बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।
लीलाक लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डेनियल रेनी ने कहा कि अंबुजा सीमेंट्स दुनिया के सबसे बड़े और उन्नत सीमेंट निर्माण नेटवर्क में से एक का संचालन करती है।
उन्होंने कहा, "हम इस सहयोग की शुरुआत को लेकर बेहद उत्साहित हैं। हमारा लक्ष्य कम लागत और कम-कार्बन वाले सीमेंट उत्पादन के लिए वाणिज्यिक स्तर की परियोजना विकसित करना है। हम मिलकर वैश्विक सीमेंट उद्योग के लिए एक आर्थिक, दोहराई जा सकने वाली और भविष्य के अनुरूप समाधान प्रस्तुत करना चाहते हैं।"
कंपनी का कहना है कि यह साझेदारी कार्बन कैप्चर की लागत को कम करने में भी मदद करेगी, जिससे बड़े पैमाने पर कार्बन कैप्चर और उसके उपयोग (सीसीयू) की तकनीक को अपनाने का आर्थिक आधार और मजबूत होगा।
अंबुजा सीमेंट्स वर्तमान में सीमेंट निर्माण प्रक्रियाओं के विद्युतीकरण पर भी तेजी से काम कर रही है। कंपनी के पास लगभग 1 गीगावाट की कैप्टिव हरित ऊर्जा क्षमता है, जिसके जरिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
कंपनी का मानना है कि इस तरह की पहल भविष्य में कार्बन कैप्चर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने की मजबूत नींव तैयार करेगी।


