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बजट के बाद छात्रों संग संवाद, सीतारमण ने ‘प्रगति’ की जमकर तारीफ

केंद्रीय बजट 2026-27 को पेश करने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों से बातचीत की

बजट के बाद छात्रों संग संवाद, सीतारमण ने ‘प्रगति’ की जमकर तारीफ
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पीएम मोदी की पहल, वरिष्ठ अधिकारियों को पहली पोस्टिंग वाले जिलों का दौरा करने का निर्देश

  • योजनाओं की समीक्षा से काम में तेजी, सीतारमण ने बताया ‘प्रगति’ का असर
  • युवाओं को देश का भावी नेता बताते हुए वित्त मंत्री ने किया संवाद
  • बजट प्रक्रिया पर खुलासा, उद्योग और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर होती है तैयारी

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 को पेश करने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने 'प्रगति' की जमकर तारीफ की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह प्रधानमंत्री ने दिल्ली में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पहले तैनाती वाले इलाकों का दौरा करने का निर्देश दिया।

छात्रों से बातचीत के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 'प्रगति' की हर महीने बैठक होती है। इसकी बैठक में पीएम खुद शामिल होते हैं और जिले के अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया जाता है। इसमें केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं के बारे में जानकारी मांगी जाती है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान जिले में चल रहे प्रोजेक्ट की समीक्षा की जाती है। इससे काम में तेजी आई है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोई आईएएस अधिकारी पहले जब किसी जिले में तैनात रहा होगा और अब वह दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारी बन गया है, पीएम मोदी ने ऐसे अधिकारियों को उन क्षेत्रों का दौरा करने के लिए कहा है, जहां उनकी पहली पोस्टिंग हुई थी। इससे उन्हें वहां हुए विकास की अच्छी जानकारी मिल सकेगी।

युवाओं के साथ बातचीत के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। आप सभी इस देश के भावी नेता हैं, और बजट तथा हमारे द्वारा किए जा रहे कार्य आपके लिए मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से हैं। मेरा मानना है कि युवाओं के साथ संवाद करना हर नेता की आकांक्षा होती है। मेरी इसमें विशेष रुचि है क्योंकि मुझे हमेशा युवाओं से जुड़ने और उनके साथ बातचीत करने का अवसर मिला है।

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी विकास दर, विकास का प्रकार और शासन शैली के कारण कुछ चीजों में देरी हुई। हर चीज में समय लगता है। औपचारिक रूप से, प्रक्रिया अक्टूबर के अंत या नवंबर में शुरू होती है, जब हम विभिन्न उद्योग समूहों, व्यवसायों, विशेषज्ञों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले अर्थशास्त्रियों को आमंत्रित करते हैं। उन्हें समूहों में बुलाया जाता है और वित्त मंत्रालय के अधिकारी एक साथ बैठकर आगे क्या किया जाना चाहिए, इस बारे में उनके सुझाव सुनते हैं।


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