'गंगा माई की बेटियां' में उठेगा दहेज प्रथा का मुद्दा, शुभांगी लाटकर बोलीं- 'ऐसी प्रथाएं समाज में आज भी मौजूद'
भारतीय समाज में दहेज प्रथा एक ऐसी समस्या रही है, जो समय के साथ कम जरूर हुई है, लेकिन आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। कई परिवारों में यह परंपरा के नाम पर निभाई जाती है

मुंबई। भारतीय समाज में दहेज प्रथा एक ऐसी समस्या रही है, जो समय के साथ कम जरूर हुई है, लेकिन आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। कई परिवारों में यह परंपरा के नाम पर निभाई जाती है। लड़कियों और उनके परिवारों को इस वजह से मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आज के दौर में टीवी शोज और फिल्मों के जरिए इन मुद्दों को उठाने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में टीवी शो 'गंगा माई की बेटियां' में इस गंभीर सामाजिक मुद्दे को सामने लाया जा रहा है। इस शो में गंगा माई का किरदार निभाने वाली शुभांगी लाटकर ने दहेज प्रथा और उससे जुड़े दबावों पर खुलकर अपनी राय रखी।
शो के हालिया एपिसोड में गंगा माई को अपनी बेटी समान साहना की शादी के लिए भारी दहेज की मांग पूरी करनी पड़ती है। इस दबाव के चलते उन्हें अपना घर तक गिरवी रखना पड़ता है। यह सीन दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि आज भी समाज में ऐसी स्थितियां मौजूद हैं।
शुभांगी लाटकर ने अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा, ''मैं गंगा माई की मजबूरी और उसकी अंदरूनी ताकत दोनों को ईमानदारी से दिखाने की कोशिश कर रही हूं। यह कहानी हमें यह एहसास दिलाती है कि समाज में दहेज जैसी प्रथाएं कितनी गहराई से जमी हुई हैं, लेकिन साथ ही यह भी दिखाती है कि अगर हिम्मत हो तो बदलाव लाया जा सकता है और गलत के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है।''
शुभांगी लाटकर ने आगे कहा, ''पहले के समय में दहेज जैसी स्थितियां आम थीं, भले ही लोग इसके बारे में खुलकर बात नहीं करते थे, लेकिन उनके परिवार में हमेशा यह सिखाया गया कि रिश्ते सम्मान और विश्वास पर टिके होने चाहिए, न कि लेन-देन पर। अगर कोई चीज सिद्धांतों के खिलाफ होती थी तो उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। सही के लिए खड़े रहना जरूरी है, चाहे वह कितना भी मुश्किल क्यों न हो।''
एक मां के रूप में भी शुभांगी लाटकर ने अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा, ''मैं अपनी बेटी को हमेशा यह सिखाती हूं कि खुद का सम्मान सबसे ज्यादा जरूरी है। किसी भी रिश्ते के लिए अपनी इज्जत से समझौता नहीं करना चाहिए। हर लड़की को यह समझना चाहिए कि उसे बिना किसी शर्त के प्यार और सम्मान मिलना चाहिए। अगर कोई स्थिति इसके खिलाफ हो तो उसके खिलाफ आवाज उठाना ही सही कदम होता है।''
शो में शीजान खान और अमनदीप सिद्धू भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। यह शो लगातार ऐसे मुद्दों को उठाता रहा है जो समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। आने वाले एपिसोड्स में दर्शक देखेंगे कि गंगा माई, साहना और स्नेहा मिलकर दहेज के खिलाफ एक मजबूत कदम उठाती हैं। इसके साथ ही कहानी में एक नया मोड़ भी आएगा, जहां दुर्गावती को यह सच्चाई पता चलेगी कि सिद्धू किसी और से प्यार करता है।
'गंगा माई की बेटियां', जी टीवी पर प्रसारित यह शो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि बदलाव की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए।


