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राजनीति को अपराधमुक्त बनाने के फैसले का भाजपा ने उड़ाया मजाक : कांग्रेस

कांग्रेस ने राजनीति में अपराधियों की घुसपैठ रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय के फैसले को महत्वपूर्ण मानते हुए इसका स्वागत किया और कहा कि इससे राजनीति में शुद्धता आएगी

राजनीति को अपराधमुक्त बनाने के फैसले का भाजपा ने उड़ाया मजाक : कांग्रेस
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नई दिल्ली। कांग्रेस ने राजनीति में अपराधियों की घुसपैठ रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय के फैसले को महत्वपूर्ण मानते हुए इसका स्वागत किया और कहा कि इससे राजनीति में शुद्धता आएगी लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने पहले दिन ही इस निर्णय का इसका कर्नाटक में मजाक उड़ाया है।

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने न्यायालय का फैसला आने के बाद गुरुवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस हिंदुस्तान की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए इस फैसले को अहम मानती है इसलिए पार्टी इसका स्वागत करती है। यह निर्णय राजनीति को अपराध और अपराधी मुक्त करने की दिशा में अहम है और सही मायने में राजनीति को स्वच्छता की ओर ले जाने वाला है।

गौरतलब है कि शीर्ष न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राजनीतिक दलों को अाज निर्देश दिया कि वे आपराधिक पृष्‍ठभूमि वाले उम्‍मीदवारों की सूची और चयन का कारण अपनी वेबसाइटों पर अपलोड करें।

श्री शेरगिल ने कहा कि एक तरफ न्यायालय सहित देश के सभी नागरिक राजनीति को अपराध और आपराधियों से मुक्त देखना चाहते हैं और दूसरी तरफ भाजपा ने न्यायालय के फैसले का मजाक उड़ाते हुए कर्नाटक में आज ही आनंद सिंह को मंत्री बनाया है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के 15 मामले चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले का भाजपा ने पहले ही दिन क्रूरता से मजाक बनाया है। पार्टी ने कई मामलों के आरोपी को सिर्फ मंत्रिमंडल में ही जगह नहीं दी है बल्कि उन्हें उसी विभाग का मंत्री बनाया जिसमें भ्रष्टाचार करने के आरोप में उनके खिलाफ पहले से ही आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। श्री सिंह बेल्लारी माइनिंग गैंग के सदस्य हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि कर्नाटक की यह घटना साबित करती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘ न खाऊँगा न खाने दूँगा’ का नारा सही में ‘खाओ, पिओ, ऐश करो है’। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल को अपनी वेबसाइट पर, सोशल मीडिया के माध्यम से अखबार में इश्तेहार के माध्यम से यह सूचना जारी करने के लिए न्यायालय ने जो फैसला दिया है वह बहुत गंभीर है और सोचना पड़ेगा कि आखिर न्यायालय को इतनी तल्ख टिप्पणी क्यों करनी पड़ी।


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