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अमित शाह के बिहार दौरे से पहले भाजपा और जेडीयू में छिड़ा संग्राम  

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह के बिहार दौरे से पहले ही एक बार फिर भाजपा और जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) के नेता आमने सामने हो गए हैं।

अमित शाह के बिहार दौरे से पहले भाजपा और जेडीयू में छिड़ा संग्राम  
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नई दिल्ली| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह के बिहार दौरे से पहले ही एक बार फिर भाजपा और जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) के नेता आमने सामने हो गए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान के एक बयान पर जद-यू और भाजपा में वाक युद्ध शुरू हो गया है। संजय पासवान द्वारा बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर दिए गए बयान पर जद-यू ने कड़ी नराजगी जताई है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी. त्यागी ने संजय पासवान के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि भाजपा ऐसे बयानों को बर्दाश्त कैसे कर रही है। यह मेरे लिए चिंता का बिषय है।"

त्यागी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि संजय पासवान के गैर अनुशासित बयान पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह संज्ञान लेंगे और आगे से इस तरह के बयान पर रोक लगाएंगे।"

के.सी. त्यागी ने भाजपा को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि भाजपा जाति, धर्म की राजनीति से दूर रहती है, फिर किसी जाति विशेष का नाम लेकर वक्तव्य देना भाजपा की घोषित नीतियों के विरुद्ध है।

के.सी. त्यागी ने यह भी कहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि बिहार में विधानसभा का चुनाव राजग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगा।

बता दें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह साफ कर चुके हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ही राजग का चेहरा होंगे। भाजपा, जदयू और लोजपा द्वारा राज्य में अगला विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

लेकिन बुधवार को भाजपा शीर्ष नेतृत्व से उलट पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा विधान पार्षद डॉ. संजय पासवान ने मुख्यमंत्री पद पर भाजपा की दावेदारी जताई और साफ साफ कहा कि जनता अब भाजपा के किसी पिछड़े वर्ग के नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है।

पासवान ने यह भी कहा कि जिस तरह से फीडबैक मिल रहे हैं उससे भाजपा की ओर से उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी या केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को मुख्यमंत्री के रूप में सामने रख चुनाव लड़ा जा सकता है। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री का पद किसी सवर्ण या दलित या फिर दोनों को दिया जा सकता है।


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