जेब ढीली करो, ड्रायविंग लायसेंस लो
बिलासपुर ! शासन ने परिवहन विभाग को आदेश दिया है कि ड्रायविंग लाइसेंस को तीन दिन में बनाकर दिया जाए। मगर परिवहन विभाग के ड्राइविंग लाइसेंस में आम जनता को परेशान किया जा रहा है।

आरटीओ दफ्तर में बिना पैसे दिए नहीं होता काम
3 दिनों में लायसेंस जारी करने का है आदेश
आवेदन देने के बाद कटवाते हैं चक्कर
रकम खर्च नहीं करने पर लग जाते हैं महिनों
बिलासपुर ! शासन ने परिवहन विभाग को आदेश दिया है कि ड्रायविंग लाइसेंस को तीन दिन में बनाकर दिया जाए। मगर परिवहन विभाग के ड्राइविंग लाइसेंस में आम जनता को परेशान किया जा रहा है।
जब आवेदनकर्ता ड्राइविंग लाइसेंस का फार्म जमा करते हैं तो कर्मचारियों द्वारा फार्म को गलत बताकर वापस कर दिया जाता है। ड्राइविंग लाइसेंस शाखा के बाहर कर्मचारी के करीबी लोग मौजूद रहते हैं। आवेदनकर्ता के संपर्क में आकर फार्म को सही करने के लिए पैसे की वसूल करते हैं। इसके बाद ही लायसेंस का फार्म शाखा में जमा होता है। विभाग तक आवेदनकर्ता से लायसेंस टेस्ट की जांच करती है तो विभाग के कर्मचारियों द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस की जांच रिपोर्ट पास करने का कमीशनखोरी खुलेरुप चलती है। आम जनता का बिना पैसे खर्च किए परिवहन विभाग में काम नहीं होता। जो व्यक्ति पैसा खर्च नहीं करता, उसके काम को महीने लगा दिया जाता है।
परिवहन विभाग के कर्मचारी अपने करीबियों के जरिए ही काम करते हैं। बिना दलालों के परिवहन विभाग में आज भी काम नहीं होता है। जबकि विभाग में सी सी कैमरा लगाने के बाद भी दलालों का कब्जा बना हुआ है। दलाल विभाग के कामकाज में हस्तक्षेप तक करते हैं। परिवहन विभाग का दावा है कि दलालों से विभाग मुक्त हो गया है लेकिन परिवहन विभाग का दावा खोखला साबित हुआ है। जबकि हर दिन ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदनों की संख्या सैकड़ों में होती है। मगर विभाग में आम जनता जानकारी लेने के लिए भटकती रहती है।
दलालों से नहीं मिली मुक्ति
सूत्रों के मुताबिक परिवहन विभाग में आज भी दलालों के बिना एक भी काम नहीं होता है। जबकि परिवहन विभाग का दावा है कि विभाग दलालों से मुक्त हो गया है। मगर ऐसा नहीं है। परिवहन विभाग के ड्राइविंग लाइसेंस शाखा में आम जनता को काफी परेशान किया जाता है। जब लोग ड्राइविंग लाइसेंस का आवेदन शाखा में जमा करते हैं तो उन्हें कर्मचारियों द्वारा आवेदन को गलत बताकर वापस कर दिया जाता है।
कर्मचारी आवेदन में क्या गलत है इसकी भी जवाब नहीं देते। आवेदन फार्म को लेकर वापस आने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस शाखा के बाहर में कर्मचारी के करीबी दलाल मौजूद मिलते हैं वे आवेदनकर्ता को अपने संपर्क में लेते हैं। फार्म को सही किया जाता है। फार्म को सही करने में पैसे वसूली किए जाते हैं।
ढाई हजार तक हो जाते हैं खर्च
जब विभाग के कर्मचारी ड्राइविंग जांच करते हैं तो बिना पैसे लिए जांच रिपोर्ट पास नहीं की जाती जांच रिपोर्ट ओके करने के लिए मोटा कमीशन मांगा जाता है।
शासन के नियम के अनुसार ड्राइविंग के लिए सात सौ खर्च होने चाहिए लेकिन आवेदनकर्ता को ड्राइविंग लायसेंस बनवाने में ढाई हजार से ज्यादा खर्च करना पड़ता है। एक दलाल ड्राइविंग लायसेंस को बनाने में तीन हजार का खर्च आवेदनकर्ता लिया जाता है। दलाल विभाग में कमीशन देकर अपना हिस्सा भी ले लेता है। मगर आम जनता को तीन गुना अधिक पैसा देकर लायसेंस बनवाना पड़ता है। जबकि शासन ने विभाग को आदेश दिया है कि ड्राइविंग लायसेंस को तीन दिन में बनाकर दिया जाए मगर विभाग में ड्राइविंग लायसेंस बनाने में पंद्रह दिन का समय लिया जाता है। हर दिन सैकड़ों आवेदन विभाग में पहुंचते हैं लेकिन तीन दिन में लायसेंस को बनाकर नहीं दिया जाता जबकि परिवहन विभाग का कामकाज ऑनलाईन हो चुका है। ऑनलाईन होने के बाद लायसेंस बनाने में तीन दिन का समय काफी होता है परंतु आम जनता के हक में ड्राइविंग लायसेंस पंद्रह दिन में आता है।
कामकाज ऑनलाइन
आनलाइन होने के बाद भी कामकाज काफी धीमी गति से चलता है। बिना दलाल के विभाग में कागज आगे नहीं बढ़ता। दलालों का हस्तक्षेप यहां के कामकाज में होता है जबकि विभाग दावा करता है कि विभाग दलालाल से मुक्त हो गया है। लेकिन विभाग का दावा खोखला साबित हो रहा है, जबकि विभाग में सी सी कैमरा लगा होने के बाद भी दलाल अपना काम करते रहते हैं। आम जनता बिना दलालों के विभाग में कामकाज नहीं होता है। दलाल विभाग रोजाना हजारों की कमाई करते हैं। आम जनता को दलाल द्वारा लूटा जा रहा है।
टेस्ट के बाद तीन दिन
शासन का आदेश तो है कि ड्राइविंग लायसेंस तीन दिनों में बनाकर देना है। ड्राइविंग टेस्ट के बाद तीन दिन में लायसेंस देना होता है।
देवेन्द्र केशरवानी
अधिकारी
परिवहन विभाग


