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ग्रामीण महिलाओं ने शराब दुकान ढहाई

बिलासपुर ! एक तरफ चारों ओर शराबबंदी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है वहीं आज सुबह सकरी के हाफा गांव में दर्जनों महिलाओं ने निर्माणाधीन शराब दुकान को ढहा दिया।

ग्रामीण महिलाओं ने शराब दुकान ढहाई
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सकरी में दुकान खोलने का विरोध, अन्यत्र खोली जाएगी दुकान-आबकारी अधिकारी
बिलासपुर ! एक तरफ चारों ओर शराबबंदी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है वहीं आज सुबह सकरी के हाफा गांव में दर्जनों महिलाओं ने निर्माणाधीन शराब दुकान को ढहा दिया। बताया जाता है कि अचानक ग्रामीण महिलाएं वहां पहुंची और शराब दुकान को तहस-नहस कर दिया। निर्माणाधीन शराब दुकान में तोडफ़ोड़ की जानकारी मिलते ही आबकारी अमला वहां पहुंचा और उग्र ग्रामीण महिलाओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे शराब दुकान बंद करने की मांग पर अड़ी रहीं। आबकारी अधिकारियों ने महिलाओं से कहा कि शराब दुकान यहां से दूसरी तरफ स्थानांतरित की जाएगी वहीं दूसरी ओर शराब की बिक्री व्यवस्थित ढंग से करने में शासन असफल साबित हो रहा है। भारी अव्यवस्था के बीच कार्पोरेशन को काम करना पड़ रहा है। क्योंकि दुकानों में सुरक्षा व्यवस्था की भी समस्या पेश आ रही है क्योंकि दुकानों में सुरक्षा शराब सहजता से उपलब्ध नहीं है। भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा है। कार्पोरेशन जैसे-तैसे काम इस बीच शराब दुकानों के विरोध का सिलसिला जारी है। आज शहर से लगे सकरी में शराब दुकान निर्माण का विरोध करते हुए निर्माणाधीन दुकान को तोडफ़ोड दिया। आबकारी अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामला संभाला। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर दुकान का निर्माण हो रहा है वहां वे दुकान नहीं खुलने देंगे। शराब दुकन को अन्यत्र खोला जाए।
पूर्ण शराबबंदी की मांग और चौतरफा विरोध के बाद शासन जिस कार्पोरेशन के माध्यम से शराब बिक्री कर रहा है उनकी नैया आबकारी विभाग के बगैर पार होने की संभावना नहीं है। सभी 71 शराब दुकानों का संचालन आबकारी अमला ही अप्रत्यक्ष रुप से कर रहा है। जिन 71 शराब दुकानों को चलाने के लिए ठेकेदार करीब सौ गाडिय़ों का उपयोग करते थे वहीं आबकारी विभाग सिर्फ पांच गाड़ी से काम चला रहा है। इस तरह 1 अप्रैल से पूरा आबकारी अमला हलाकान है। गार्ड की नियुक्ति नहीं होने के काराण सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। शहर से ज्यादा कोचिए गांव में सक्रिय है और अपना पुराना स्टाक खपा रहे हैं। शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी कार्रवाई आवश्यक है। शासन द्वारा जिस कार्पोरेशन के भरोसे शराब बिक्री करवाई जा रही है लगता है कि वह बिना आबकारी के सहयोग के शराब दुकान नहीं चला पाएगी और सीमित संसाधनों में आबकारी विभाग अप्रत्यक्ष रुप से दुकानों का संचालन कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अब तक किसी दुकानों में गार्ड की नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं शराब आपूर्ति भी शासन नहीं कर पा रहा है। ग्राहक दुकान से वापस लौट रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि कुछ दिनों में पूरी व्यवस्था ठीक कर ली जाएगी। शहर से लगभग कोचिए होने की कगार पर है लेकिन गांव में कोचिए अभी भी सक्रिय हैं और अपना पुराना स्टाक ज्यादा कीमत में बेच रहे हैं।
अप्रिय घटनाओं की आशंका
अव्यवस्था के बीच चल रही शराब दुकानों में कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है। बिलासपुर जिले में 71 शराब की दुकानें संचालित की जा रही है। बिक्री की रकम जिले में एक्सिस बैंक रोज दुकानों में जाकर एकत्र करना है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। दुकान के कर्मचारी ही बैंक में पैसा जमा करने जाते हैं ऐसे में लूट संभावित है। सेंदरी, रानीगांव, कोटा, तिफरा में तम्बू में दुकान चलाई जा रही है। जहां बंद होने के बाद भी ग्राहक शराब लेने जिद में उतर जाते हैं।
गार्ड की तैनाती नहीं
दुकान खुलते ही ग्राहकों की कतार लग जाती है। शाम होते ही दुकानों में पैर रखने की जगह नहीं रहती और लोग एक दूसरेको धक्का मारकर या चढक़र शराब लेने की कोशिश करते हैं। शासन शराब की दुकान चला तो रही है लेकिन किसी भी प्रकार की कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है जबकि सभी दुकानों में गार्ड की तैनाती करने का शासन ने ऐलान किया था। संभवत: इसका टेण्डर भी हो चुका है लेकिन किसी भी दुकान में गार्ड की तैनाती अब तक नहीं हुई है।


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