‘NEET, सिपाही भर्ती और शिक्षक बहाली पेपर लीक… सबमें मेरा हाथ’, EOU की पूछताछ में संजीव मुखिया ने उगले कई राज
EOU की पूछताछ में वर्ष 2017 की NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कराने की कथित साजिश को लेकर भी जानकारी जुटाई गई। एजेंसी के अनुसार, संजीव मुखिया ने इस मामले में अपने सिंडिकेट से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी दी है।

पटना: बिहार के चर्चित पेपर लीक मामलों में जांच का सामना कर रहे संजीव मुखिया से आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की रिमांड पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। बेऊर जेल से रिमांड पर लिए गए संजीव मुखिया से EOU की विशेष टीम ने कई घंटे तक पूछताछ की। एजेंसी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने से जुड़े नेटवर्क, कथित सॉल्वर गैंग, पैसों के लेन-देन और गिरोह से जुड़े लोगों के बारे में महत्वपूर्ण इनपुट मिले हैं।
2017 NEET मामले में सिंडिकेट की भूमिका पर पूछताछ
EOU की पूछताछ में वर्ष 2017 की NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कराने की कथित साजिश को लेकर भी जानकारी जुटाई गई। एजेंसी के अनुसार, संजीव मुखिया ने इस मामले में अपने सिंडिकेट से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी दी है। जांच एजेंसियां अब इन दावों की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों और पुराने केस रिकॉर्ड के आधार पर करने में जुटी हैं। पूछताछ का एक अहम हिस्सा यह भी रहा कि परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र कथित तौर पर नेटवर्क तक कैसे पहुंचते थे और इसके बाद उन्हें अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था किस तरह की जाती थी। EOU इस पूरे नेटवर्क में बिचौलियों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
सिपाही भर्ती और BPSC TRE-3 पर भी जांच का फोकस
जांच के दौरान बिहार पुलिस की सिपाही भर्ती परीक्षा, जिसे CSBC-2023 के नाम से जाना जाता है, और BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-3 से जुड़े पेपर लीक मामलों पर भी पूछताछ हुई। एजेंसी का दावा है कि संजीव मुखिया ने इन मामलों में अपनी संलिप्तता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। EOU अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग परीक्षाओं में सक्रिय रहे कथित नेटवर्क के बीच किस तरह का संपर्क था। इसके साथ ही परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल करने, उसे आगे पहुंचाने और अभ्यर्थियों तक जानकारी पहुंचने की संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है।
सॉल्वर गैंग और पैसों के नेटवर्क की तलाश
रिमांड पूछताछ में कथित सॉल्वर गैंग के नेटवर्क को लेकर भी कई जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, संजीव मुखिया ने गिरोह से जुड़े कुछ सहयोगियों, उनके संभावित ठिकानों और पैसों के लेन-देन से संबंधित जानकारी दी है। EOU इन सूचनाओं को बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जांच रिकॉर्ड से मिलाकर देख रही है। जांच एजेंसी का फोकस सिर्फ मुख्य आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की भूमिका पता लगाने पर भी है, जो कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, रकम पहुंचाने या अभ्यर्थियों से संपर्क कराने में शामिल रहे होंगे।
2017 की FIR से जुड़ा है मामला
यह कार्रवाई 7 जुलाई 2017 को पटना के पत्रकार नगर थाने में दर्ज FIR से भी जुड़ी है। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। केस में नालंदा जिले के नगरनौसा थाना क्षेत्र के शाहपुर बलवा निवासी संजीव मुखिया और उसके बेटे डॉ. शिव समेत कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। मामले की गंभीरता और कथित नेटवर्क के विस्तार को देखते हुए बाद में इसकी जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंप दी गई। अब रिमांड पूछताछ के बाद एजेंसी पुराने केस से जुड़े उन पहलुओं को भी दोबारा खंगाल रही है, जिनसे पेपर लीक नेटवर्क की व्यापकता का पता चल सकता है।
NEET-2024 मामले में CBI से मिल चुकी है राहत
संजीव मुखिया से जुड़ी जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि NEET-2024 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के बाद उसे राहत मिली थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसी साल CBI ने जांच में उसे इस मामले से जोड़ने के पर्याप्त आधार नहीं पाए और 31 अगस्त को CBI की विशेष अदालत ने भी उसे इस मामले में दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, NEET-2024 मामले में मिली इस राहत के बावजूद पुराने मामलों को लेकर EOU की जांच जारी है। एजेंसी अब अलग-अलग परीक्षा पेपर लीक मामलों के बीच संभावित कनेक्शन और कथित नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
नए सुरागों के आधार पर छापेमारी तेज
रिमांड के दौरान मिले इनपुट के आधार पर EOU ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। कथित नेटवर्क से जुड़े नए नाम, बिचौलियों और सहयोगियों की पहचान के लिए कई स्तरों पर पड़ताल की जा रही है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच का अगला चरण संजीव मुखिया से मिले दावों की स्वतंत्र पुष्टि और उनके आधार पर दूसरे संदिग्धों तक पहुंचने का है। यदि एजेंसी को इनपुट की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो पेपर लीक मामलों में कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।


