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बिहार विधानसभा के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया और मुख्य सचेतक मंजीत कुमार सिंह बनाए गए

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा के संसदीय कार्यों के संचालन के लिए मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक और सचेतक मनोनीत किए हैं

बिहार विधानसभा के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया और मुख्य सचेतक मंजीत कुमार सिंह बनाए गए
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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा के संसदीय कार्यों के संचालन के लिए मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक और सचेतक मनोनीत किए हैं। दीघा से भाजपा विधायक संजीव चौरसिया को विधानसभा में सत्तारूढ़ दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। इससे पहले इस पद पर विनोद नारायण झा थे। नीतीश कुमार के करीबी बरौली से विधायक मंजीत कुमार सिंह उप मुख्य सचेतक बनाए गए हैं।

परिहार से विधायक गायत्री देवी, गोविंदगंज से विधायक राजू तिवारी, पिपरा विधायक रामविलास कामत, हरलाखी विधायक सुधांशु शेखर, मधुबन विधायक राणा रणधीर, बेनीपुर विधायक विनय कुमार चौधरी, बनमनखी कृष्ण कुमार ऋषि, मसौढी अरुण मांझी और पटना साहिब विधायक रत्नेश कुमार को सचेतक बनाया गया है। जदयू के रामविलास कामत और विनय कुमार चौधरी को पहली बार सचेतक बनाया गया है।

बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक बनाए गए संजीव चौरसिया भाजपा के बड़े नेता हैं और अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। इनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया सिक्किम के राज्यपाल थे। संजीव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से आते हैं और छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे हैं। संजीव चौरसिया पटना के दीघा से तीन बार से विधायक हैं। बिहार में भाजपा के संगठन को मजबूती देने में अहम योगदान रहा है।

संजीव चौरसिया मुख्य सचेतक बनाए जाने पर शीर्ष नेताओं का आभार जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "बिहार विधानसभा में मुख्य सचेतक के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी एवं केंद्रीय नेतृत्व के प्रति हृदय से आभार। साथ ही नवनियुक्त उप मुख्य सचेतक व सचेतकों को बधाई।"

सचतेक, उपसचेतक और सचेतकों के मनोनीत का निर्णय आने वाले विधायी कार्यों और सदन की रणनीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सचेतक का पद लोकतांत्रिक व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी की तरह माना जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि पार्टी के सदस्य सदन के भीतर आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। इन नियुक्तियों से सरकार को सदन में अपने एजेंडे को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और विपक्षी हमलों का संगठित जवाब देने में मदद मिलती है। मुख्य सचेतक को कैबिनेट और उप सचेतक एवं सचेतक को राज्य मंत्री का दर्जा मिलता है।


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