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बिहार विधान परिषद में हंगामा: विपक्ष के सभी MLC एक दिन के लिए किए निष्कासित, सुनील सिंह व अशोक चौधरी के बीच तीखी बहस

विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग को लेकर नारेबाजी की गई। राजद एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के साथ अनुचित व्यवहार किया है और इसके लिए उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए।

पटना: बिहार विधान परिषद की कार्यवाही आज अभूतपूर्व घटनाक्रम के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा हुआ, जिसके बाद सभापति ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे विपक्ष के सभी एमएलसी को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मार्शल को निर्देश दिया कि विपक्षी सदस्यों को तत्काल बाहर निकाला जाए। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और सदन के बाहर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

कार्यवाही की शुरुआत से ही हंगामा


उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्य आक्रामक रुख में नजर आए। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग को लेकर नारेबाजी की गई। राजद एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के साथ अनुचित व्यवहार किया है और इसके लिए उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने सभापति पर पक्षपात का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। इस दौरान सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया और कार्यवाही बाधित होती रही। सभापति ने विपक्ष की ओर देखते हुए कहा कि यदि उनकी निष्पक्षता पर संदेह है तो वह खेद व्यक्त करते हैं। हालांकि, हंगामा थमने के बजाय और तेज हो गया। विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे तक की मांग कर दी और कहा कि जनता सब देख रही है।

सभापति की कड़ी कार्रवाई

लगातार व्यवधान और नारेबाजी के बीच सभापति ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने पूरे विपक्ष के सभी एमएलसी को एक दिन के लिए सदन से निष्कासित करने की घोषणा की। इसके साथ ही मार्शलों को निर्देश दिया गया कि विपक्षी सदस्यों को सदन से बाहर ले जाया जाए। यह कदम बिहार विधान परिषद के इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर व्यक्तिगत सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होती है, लेकिन यहां पूरे विपक्ष को एक साथ बाहर कर दिया गया। इस फैसले के बाद सदन का वातावरण और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

राजद और जदयू एमएलसी के बीच तीखी नोकझोंक

हंगामे के बीच राजद एमएलसी सुनील सिंह और जदयू कोटे से मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी बहस हो गई। सुनील सिंह ने मुख्यमंत्री के व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए। इसी दौरान अशोक चौधरी ने इसका विरोध किया और अपनी बात रखने की कोशिश की। दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ती गई और स्थिति नारेबाजी तक पहुंच गई। सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है और इसे तानाशाही करार दिया। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने एक स्वर में नारेबाजी शुरू कर दी।

सुनील सिंह पर अपशब्द कहने का आरोप

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब मंत्री अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि राजद एमएलसी सुनील सिंह ने उन्हें अपशब्द कहे। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि वह उस समय अशोक चौधरी के बगल में बैठे थे और उन्होंने सुनील सिंह को मंत्री के पास आकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते देखा। जायसवाल ने कहा कि एक दलित समाज से आने वाले नेता के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग बेहद निंदनीय है। उन्होंने इसे सामाजिक और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। जदयू एमएलसी खालिद अनवर ने भी सुनील सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और कहा कि केवल माफी से काम नहीं चलेगा। सभापति ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सुनील सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने तत्काल किसी दंड की घोषणा नहीं की।

सत्ता पक्ष का पलटवार

विपक्ष के निष्कासन के बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित करने का आरोप लगाया। मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहता। उनके अनुसार, सरकार विपक्ष के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए पूरी तैयारी के साथ आई थी, लेकिन विपक्ष ने हंगामे का रास्ता चुना। मंगल पांडेय ने कहा कि उच्च सदन लोकतंत्र का मंदिर है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन की मर्यादा को तार-तार कर रहा है। अशोक चौधरी ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ सदस्य विधान परिषद की कार्यवाही पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन में अनुशासन और संवाद की परंपरा को बनाए रखना जरूरी है।

सदन के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन

सदन से निष्कासित किए जाने के बाद विपक्षी सदस्य बाहर आकर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का कहना था कि लोकतंत्र में सवाल पूछना उनका अधिकार है और सरकार उससे बचने के लिए कठोर कदम उठा रही है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और वे इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे।

राजनीतिक माहौल गर्म

बिहार विधान परिषद में आज जो घटनाक्रम हुआ, उसने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर विपक्ष मुख्यमंत्री के व्यवहार और अपनी आवाज दबाए जाने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर अव्यवस्था फैलाने और सदन की गरिमा भंग करने का आरोप लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि सुनील सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और क्या दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल हो पाता है या नहीं। फिलहाल, विधान परिषद का यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।


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