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पटना में चैती छठ को लेकर तैयारी अंतिम चरण में, आठ छठ घाट असुरक्षित घोषित

लोकआस्था के महापर्व चैती छठ को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। चार दिनों के इस पर्व को लेकर प्रशासन से लेकर आम लोग तैयारी में जुटे हैं। पटना के गंगा तट पर जिला प्रशासन द्वारा व्रतियों की सुविधा के लिए तैयारी की जा रही है

पटना में चैती छठ को लेकर तैयारी अंतिम चरण में, आठ छठ घाट असुरक्षित घोषित
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पटना। लोकआस्था के महापर्व चैती छठ को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। चार दिनों के इस पर्व को लेकर प्रशासन से लेकर आम लोग तैयारी में जुटे हैं। पटना के गंगा तट पर जिला प्रशासन द्वारा व्रतियों की सुविधा के लिए तैयारी की जा रही है।

इस बीच, पटना जिला प्रशासन ने गंगा किनारे आठ छठ घाटों को खतरनाक घोषित कर दिया है। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सारी आवश्यक तैयारी की जा रही है। जिन घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है, उनमें एलसीटी घाट, राजापुर पुल घाट, पहलवान घाट, बांस घाट, शिव घाट, दीदारगंज घाट पूर्वी, रिकाबगंज घाट और बुंदेलटोली घाट शामिल हैं।

बता दें कि वर्ष में दो बार महापर्व छठ मनाया जाता है। आमतौर पर लोग कार्तिक मास के छठ को बड़े स्तर पर जानते हैं, लेकिन साल में दो बार सूर्य देव की आराधना का यह महापर्व मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाले इस पर्व को 'चैती छठ' कहा जाता है। साल 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होने जा रही है। महापर्व की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ होगी, जिसके बाद 23 मार्च को व्रती खरना का अनुष्ठान करेंगे। व्रत के तीसरे दिन यानी 24 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा।

चैती छठ को लेकर पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एस. एम. ने गुरुवार को गंगा के विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को मानकों के अनुसार दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति करने, नदी घाटों पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीम तथा गोताखोरों को तैनात रखने, रिवर पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने, मेडिकल टीम को क्रियाशील रखने तथा सीसीटीवी कैमरा एवं ड्रोन से निगरानी करने का निर्देश दिया है।

22 मार्च से 25 मार्च तक नदियों में निजी नावों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने तथा उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। विभिन्न अनुमंडलों में स्थित नदी घाटों को कई सेक्टर में विभाजित कर दो-दो मोटर बोट और अन्य आवश्यक संसाधनों सहित गोताखोरों और जवानों के साथ आठ टीमों को तैनात किया गया है।


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