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मिथिलांचल का मखाना अब दुनिया की थाली तक

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने गणतंत्र दिवस समारोह में दिखाई आने वाली झांकियों में बिहारी मखाना के चयन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि मिथिलांचल के पारंपरिक पोखरों से निकलकर मखाना आज दुनिया की थाली तक पहुंच चुका है और विकसित बिहार की मुहिम में एक सशक्त पहचान बन कर उभरा है

मिथिलांचल का मखाना अब दुनिया की थाली तक
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बिहार की झांकी में मखाना को मिला लोकल से ग्लोबल पहचान

  • जीआई टैग और किसानों की मेहनत ने बनाया मखाना सुपरफूड
  • भारत पर्व 2026 में बिहार की झांकी ने दिखाई सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत
  • परंपरा और इनोवेशन से मखाना बना आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

‎पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने गणतंत्र दिवस समारोह में दिखाई आने वाली झांकियों में बिहारी मखाना के चयन पर प्रसन्नता जताते हुए शुक्रवार को कहा कि मिथिलांचल के पारंपरिक पोखरों से निकलकर मखाना आज दुनिया की थाली तक पहुंच चुका है और विकसित बिहार की मुहिम में एक सशक्त पहचान बन कर उभरा है।

श्री सरावगी ने आज बयान जारी कर कहा कि रक्षा मंत्रालय की तरफ से आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों में बिहार के मखाना को स्थान मिलना मिथिलांचल के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय की तरफ से आयोजित भारत पर्व 2026 में बिहार की झांकी ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सामर्थ्य को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया है, जिसमे मखाना को जगह मिली है। उन्होंने कहा कि बिहार की झांकी का थीम है, मखाना: लोकल से ग्लोबल तक। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस को भारत पर्व के तहत देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को झांकियों, हस्तशिल्प, खानपान और परंपराओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है ।

‎भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ‘जीआई टैग’ से मिली वैश्विक पहचान, महिला सहभागिता की मजबूत भूमिका और किसानों के अथक परिश्रम ने मखाना को एक अंतरराष्ट्रीय सुपरफूड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि यह झांकी न केवल बिहार की प्रगति को दर्शाएगी, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान को भी और अधिक सुदृढ़ करेगी।

‎ ‎श्री सरावगी ने कहा कि बिहार की झांकी यह संदेश देती है कि परंपरा, कड़ी मेहनत और इनोवेशन के संगम से स्थानीय आजीविका को एक ग्लोबल पहचान दी जा सकती है। यह झांकी हमारी विरासत और उद्यमिता का संगम है। उन्होंने कहा कि यह झांकी इस संदेश को भी परिलक्षित करता है कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना के साथ स्थानीय उत्पादों को नवाचार के जरिए विश्व स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।


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