बिहार में बाढ़ का कहर: 11 जिलों में 10.26 लाख आबादी प्रभावित, 1.21 लाख लोगों को कराया गया भोजन
बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग प्रभावित जिलों में पूरी तरह मुस्तैद है

पटना। बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग प्रभावित जिलों में पूरी तरह मुस्तैद है। शनिवार तक राज्य के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में करीब 10.26 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, शनिवार बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के लिए 50 चिकित्सा शिविर, 19 वोट एम्बुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
विस्थापित और प्रभावित लोगों के निष्क्रमण तथा आवागमन के लिए 858 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। वहीं, प्रभावित परिवारों के बीच अब तक 12 हजार से अधिक पॉलीथीन शीट और करीब 2,300 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ पीड़ितों को दो समय गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 1.21 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है।
इसके अलावा, वैशाली जिले में एक राहत शिविर भी संचालित है, जहां करीब 326 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। संभावित आपदा से निपटने और त्वरित राहत-बचाव के लिए राज्य में एनडीआरएफ की 7 और एसडीआरएफ की 27 टीमें विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात हैं।
विभाग के मुताबिक, पटना के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर, बंका घाट में 49.45 मीटर और पंडारक में 43.79 मीटर दर्ज किया गया है। इन स्थानों पर गंगा का जलस्तर सर्वोच्च बाढ़ स्तर (एचएफएल) से ऊपर बह रहा है।
गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा नदियां भी विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं। सारण जिले के माही नदी में त्रिलोकचक के पास करीब 20 मीटर में तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है। मौके पर एसडीआरएफ की टीम को भेजा गया है। वहीं, वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 1.26 लाख क्यूसेक, वीरपुर बराज पर कोसी का 1.77 लाख क्यूसेक और इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 3.07 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया है।
मौसम विभाग द्वारा अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। पटना में जलजमाव की स्थिति से निपटने के लिए सभी 56 डीपीएस चालू किए गए हैं। साथ ही नगर निगम के छह अंचलों में 94 अतिरिक्त पंप जल निकासी के लिए लगाए गए हैं।
जल निकासी का दबाव कम करने के लिए पटना और दानापुर कैनाल में जल संसाधन विभाग द्वारा डिस्चार्ज बंद किया जा रहा है। वहीं, गंगा से बैकफ्लो रोकने के लिए 13 छोटे नालों के स्लूस गेट बंद किए गए हैं और जल निकासी के लिए पंप सेट लगाए जा रहे हैं।


