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जीडीपी आंकड़ों पर कांग्रेस को चिराग पासवान का जवाब, बोले- सच्चाई स्वीकार नहीं करना विपक्ष की सबसे बड़ी समस्या

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह न तो चुनावी नतीजों की सच्चाई स्वीकार करना चाहती है और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों को मानने के लिए तैयार है।

जीडीपी आंकड़ों पर कांग्रेस को चिराग पासवान का जवाब, बोले- सच्चाई स्वीकार नहीं करना विपक्ष की सबसे बड़ी समस्या
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह न तो चुनावी नतीजों की सच्चाई स्वीकार करना चाहती है और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों को मानने के लिए तैयार है।

चिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस एक ऐसे 'बुलबुले' में जी रही है, जहां उसे सरकार का हर काम गलत ही दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि हाल में जारी जीडीपी के आंकड़े पूरी तरह प्रमाणिक और सत्यापित रिपोर्ट पर आधारित हैं। ऐसे में हर उपलब्धि को मनगढ़ंत, स्क्रिप्टेड या हेरफेर वाला बताना स्वस्थ राजनीति नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों और कामकाज की आलोचना करे, लेकिन हर अच्छी पहल और उपलब्धि को पूरी तरह खारिज कर देना लोकतांत्रिक राजनीति के लिए सही नहीं है। चिराग पासवान ने कांग्रेस से वास्तविकता को स्वीकार करने और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की अपील की।

वहीं, बिहार सरकार द्वारा राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की सुरक्षा कटौती के मुद्दे पर भी चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को दी जाने वाली सुरक्षा खतरे के आकलन के आधार पर तय होती है। यदि खतरा अधिक होता है तो सुरक्षा बढ़ाई जाती है और खतरा कम होने पर सुरक्षा में बदलाव या कटौती की जाती है। उन्होंने अपने उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार उन्हें अधिक सुरक्षा मिली, फिर सुरक्षा कम हुई और बाद में दोबारा बढ़ाई गई।

उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसके पीछे राजनीतिक कारण तलाशना उचित नहीं है। चिराग पासवान कहा कि सुरक्षा संबंधी फैसले विस्तृत जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर लिए जाते हैं। ऐसे नियमित प्रशासनिक निर्णयों को राजनीतिक रंग देना लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वस्थ राजनीतिक माहौल के लिए ठीक नहीं है।


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