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Bihar Politics: बेटे को मंत्री नहीं बनाने पर फूटा बाहुबली का गुस्सा, पार्टी से दे दिए बगावत के संकेत

सीतामढ़ी के डुमरा स्थित एक होटल सभागार में महाराणा प्रताप प्रतिमा अनावरण समारोह का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम में पहुंचे आनंद मोहन ने अपने संबोधन के दौरान बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में कई मुद्दों पर बात की।

Bihar Politics: बेटे को मंत्री नहीं बनाने पर फूटा बाहुबली का गुस्सा, पार्टी से दे दिए बगावत के संकेत
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सीतामढ़ी। Bihar Politics: बिहार की राजनीति में रविवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सीतामढ़ी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपनी ही पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और राज्य सरकार पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। मंच से दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने न केवल पार्टी के भीतर चल रही कथित गुटबाजी और “थैली की राजनीति” पर सवाल उठाए, बल्कि बेटे चेतन आनंद को मंत्री न बनाए जाने को लेकर भी अपना दर्द खुलकर सामने रखा।

कार्यक्रम में दिखी नाराजगी की झलक

सीतामढ़ी के डुमरा स्थित एक होटल सभागार में महाराणा प्रताप प्रतिमा अनावरण समारोह का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम में पहुंचे आनंद मोहन ने अपने संबोधन के दौरान बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए जितना त्याग और संघर्ष किया, वैसा शायद ही किसी और ने किया हो। आनंद मोहन ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के एक संकेत पर मंत्री पद तक छोड़ दिया था और हर परिस्थिति में साथ निभाया। इसके बावजूद अब उन्हें और उनके परिवार को नजरअंदाज किया जा रहा है।

जेडीयू में ‘थैली की राजनीति’ का आरोप

अपने भाषण में आनंद मोहन ने जेडीयू के भीतर पैसों के प्रभाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में अब विचारधारा और संघर्ष की जगह “थैली की राजनीति” हावी हो गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज पार्टी में वही लोग आगे बढ़ रहे हैं, जिनके पास पैसा और प्रभाव है। संघर्ष करने वाले और लंबे समय से संगठन से जुड़े नेताओं को पीछे धकेला जा रहा है। आनंद मोहन ने कहा कि जेडीयू में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि “व्यक्ति नहीं, पैसा बोल रहा है।” उनका यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

‘टाइगर अभी जिंदा है’ कहकर दी चेतावनी

पूर्व सांसद ने हाल के विधान परिषद चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता अब इस तरह की राजनीति को समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि बक्सर और आरा जैसे क्षेत्रों में लोगों ने कथित धनबल की राजनीति को नकार दिया है। इसी दौरान उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आने वाले चुनावों में भी जनता अपना जवाब देगी और तब सभी को पता चल जाएगा कि “टाइगर अभी जिंदा है।” उनके इस बयान को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

‘नीतीश कुमार को जिंदा दफन कर दिया गया’

आनंद मोहन ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वर्तमान स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मुख्यमंत्री की मजबूरियों का फायदा उठा रहे हैं और उन्हें पूरी तरह नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज ऐसी स्थिति बना दी गई है मानो नीतीश कुमार को “जिंदा दफन” कर दिया गया हो। आनंद मोहन ने सवाल उठाया कि सरकारी कार्यक्रमों, पोस्टरों और विज्ञापनों में मुख्यमंत्री की तस्वीरें तक कम दिखाई देती हैं, जबकि सहयोगी दलों और अन्य नेताओं को प्रमुखता दी जा रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए वे भाजपा को दोषी नहीं मानते। उनका कहना था कि हर राजनीतिक दल अपना विस्तार चाहता है, लेकिन जेडीयू के भीतर बैठे कुछ लोग ही मुख्यमंत्री की राजनीतिक भूमिका को सीमित कर रहे हैं।

बेटे चेतन आनंद को लेकर छलका दर्द

कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा भावुक पल तब आया जब आनंद मोहन ने अपने बेटे और विधायक चेतन आनंद को मंत्री पद न मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब सरकार संकट में थी, तब चेतन आनंद ने आगे बढ़कर सरकार बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि अगर उनका बेटा सरकार बचाने का काम कर सकता है, तो वह सरकार चलाने की क्षमता भी रखता है। आनंद मोहन ने संकेतों में कहा कि आने वाले समय में परिस्थितियां बदलेंगी और तब लोगों को अपनी राजनीतिक गलतियों का एहसास होगा।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

आनंद मोहन के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि जेडीयू के अंदर बढ़ते असंतोष की झलक भी हो सकती है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आनंद मोहन के तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की सियासत में आने वाले दिनों में कई नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।


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