Bihar: तेजस्वी के आंदोलन से पहले बिहार सरकार का बड़ा फैसला, इन हथियारों के इस्तेमाल पर लगी रोक
पुलिस का यह फैसला सीवान में छात्रों पर कार्रवाई के विवाद के बीच आया है। इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया।

पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है। अब विधि-व्यवस्था ड्यूटी और भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिसकर्मी AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश में इन हथियारों के उपयोग को बेहद सीमित कर दिया गया है। यह आदेश ऐसे समय सामने आया है, जब सीवान में छात्रों पर कथित तौर पर AK-47 से गोली चलाए जाने के मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना के विरोध में 19 अगस्त को पटना में राजभवन मार्च निकालने का ऐलान किया है। ऐसे में पुलिस मुख्यालय का यह निर्देश राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
किन परिस्थितियों में हो सकेगा असॉल्ट हथियारों का इस्तेमाल?
बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश के मुताबिक, AK-47, INSAS और SLR जैसे हथियारों का इस्तेमाल अब सामान्य विधि-व्यवस्था ड्यूटी या भीड़ नियंत्रण के दौरान नहीं किया जाएगा। इन हथियारों के उपयोग को उग्रवाद, आतंकवाद और बड़े अपराधियों से जुड़े गंभीर मामलों तक सीमित किया गया है। निर्देश में पुलिस अधिकारियों और जवानों को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी के दौरान इन हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में पुलिस कार्रवाई को नियंत्रित और अनुपातिक बनाए रखना बताया जा रहा है।
साथ ले जाने की स्थिति में भी इस्तेमाल पर रोक
पुलिस मुख्यालय के आदेश में एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही गई है कि अगर किसी विशेष परिस्थिति में इन असॉल्ट हथियारों को ड्यूटी के दौरान साथ ले जाना जरूरी हो, तब भी भीड़ नियंत्रण या विधि-व्यवस्था की स्थिति में इन्हें इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। यानी केवल हथियार साथ रखने की जरूरत पड़ने से उनके इस्तेमाल की इजाजत नहीं मिल जाएगी। पुलिस अधिकारियों और जवानों को आदेश का सख्ती से पालन करना होगा। मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस आदेश को प्रभावी तरीके से लागू कराएं।
सीवान की घटना के बाद बढ़ा विवाद
पुलिस का यह फैसला सीवान में छात्रों पर कार्रवाई के विवाद के बीच आया है। इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, घटना से जुड़े तमाम पहलुओं की वास्तविक स्थिति जांच का विषय है। इसी को आधार बनाकर तेजस्वी यादव ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका सवाल है कि आखिर छात्रों पर AK-47 से गोली चलाने का आदेश किसने दिया और इसके लिए जिम्मेदारी किस अधिकारी की बनती है।
19 अगस्त को राजभवन मार्च का ऐलान
तेजस्वी यादव ने कहा है कि छात्रों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के विरोध में 19 अगस्त को पटना में विशाल राजभवन मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जानी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ इतनी गंभीर कार्रवाई का आदेश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने सरकार से जवाब मांगते हुए दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
सरकार के फैसले से क्या बदलेगा?
पुलिस मुख्यालय का नया निर्देश कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस के हथियारों के इस्तेमाल की रणनीति में बदलाव का संकेत देता है। भीड़ नियंत्रण जैसी परिस्थितियों में अब असॉल्ट राइफलों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट प्रतिबंध रहेगा। यह फैसला पुलिस कार्रवाई को लेकर भविष्य में होने वाली जवाबदेही की बहस में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर तब, जब किसी प्रदर्शन, आंदोलन या भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस बल की तैनाती की जाती है।


