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बिहार: पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के पूर्व विधायक की जमानत याचिका खारिज की

पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के पूर्व विधायक और कथित दबंग रीतलाल यादव उर्फ ​​रीतलाल राय की गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़े मामले में दायर जमानत याचिका खारिज कर दी है।

बिहार: पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के पूर्व विधायक की जमानत याचिका खारिज की
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पटना। पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के पूर्व विधायक और कथित दबंग रीतलाल यादव उर्फ ​​रीतलाल राय की गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़े मामले में दायर जमानत याचिका खारिज कर दी है।

न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने पाया कि आरोपों की गंभीरता और याचिकाकर्ता के लंबे आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है।

यह मामला खगौल पुलिस स्टेशन से संबंधित है, जिसमें रीतलाल यादव पर जबरन वसूली, निजी और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा, आपराधिक बल का प्रयोग और संगठित आपराधिक गिरोह चलाने के आरोप हैं।

सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि रीतलाल यादव के प्रभाव ने क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया है और उनकी रिहाई से जांच में बाधा आ सकती है और न्यायिक प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।

पूर्व विधायक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र नारायण ने कानूनी आधारों का हवाला देते हुए जमानत देने के पक्ष में दलीलें दीं और अपने मुवक्किल के लिए राहत की मांग की।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अजय मिश्रा ने अदालत को बताया कि रितलाल यादव के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में लगभग 40 आपराधिक मामले लंबित हैं।

अदालत ने पुलिस डायरी का संज्ञान लेते हुए पाया कि इतनी बड़ी संख्या में लंबित मामले जमानत देने के मामले को काफी कमजोर कर देते हैं।

अदालत ने आगे कहा कि इतने व्यापक आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को खुलेआम घूमने देना सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

रीतलाल यादव इस मामले में 13 जून, 2025 से जेल में बंद हैं और न्यायिक हिरासत में हैं।

उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद, हाईकोर्ट से राहत मिलने तक वे हिरासत में ही रहेंगे।

हाईकोर्ट का यह आदेश जबरन वसूली, अवैध भूमि अधिग्रहण और संगठित आपराधिक गतिविधियों से संबंधित चल रही कानूनी कार्यवाही के मद्देनजर आया है।

पटना हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, रीतलाल यादव के पास अब विधिवत प्रक्रिया के अनुसार राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का कानूनी विकल्प है।


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