Top
Begin typing your search above and press return to search.

बिहार में राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन रद्द, CM सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के फैसले को पलटा

यह निर्णय इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार संभाल रहे पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इन कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने हड़ताल पर गए 224 राजस्व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था।

बिहार में राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन रद्द, CM सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के फैसले को पलटा
X
पटना। बिहार की राजनीति में हालिया बदलाव के बाद नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए हड़ताल पर गए राजस्व कर्मचारियों को राहत दी है। राज्य सरकार ने करीब ढाई महीने से निलंबन झेल रहे कर्मचारियों का सस्पेंशन रद्द करने का ऐलान किया है। इस कदम को सरकार की ओर से सख्त रुख से नरमी की ओर बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्व सरकार के फैसले को किया निरस्त

यह निर्णय इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार संभाल रहे पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इन कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने हड़ताल पर गए 224 राजस्व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। ये कर्मचारी 11 फरवरी से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। इसके बाद स्थिति और गंभीर हो गई, जब 9 मार्च से अंचल अधिकारी (CO) और अन्य राजस्व अधिकारी भी हड़ताल में शामिल हो गए। उनके खिलाफ भी 45 से अधिक निलंबन की कार्रवाई की गई थी। इससे पूरे विभाग का कामकाज लगभग ठप पड़ गया था।

नए सीएम का पहला बड़ा प्रशासनिक कदम

मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सम्राट चौधरी का यह पहला बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है। उन्होंने न केवल पूर्व निर्णय को पलटा, बल्कि स्पष्ट निर्देश भी दिए कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए सभी कर्मचारियों की जल्द बहाली सुनिश्चित की जाए। सरकार ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि बहाली की प्रक्रिया में देरी न हो और सभी कर्मचारियों को जल्द से जल्द काम पर वापस लाया जाए। साथ ही कर्मचारियों से भी अपेक्षा की गई है कि वे तुरंत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू करें।

सरकार ने क्यों बदला रुख?

सरकार के इस फैसले के पीछे व्यावहारिक कारण भी हैं। वर्तमान में बिहार में जनगणना का कार्य चल रहा है, जो एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इस काम में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसके अलावा, अंचल कार्यालयों में जमीन से जुड़े कई जरूरी काम, जैसे दाखिल-खारिज, भूमि विवाद और अन्य राजस्व मामलों का निपटारा भी लंबे समय से ठप पड़ा था। इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। सरकार चाहती है कि प्रशासनिक व्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाए और जनता को राहत मिले। इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

कर्मचारियों के प्रति नरम रुख

सम्राट चौधरी सरकार ने इस मामले में अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है। जहां पहले कर्मचारियों पर सख्ती दिखाई गई थी, वहीं अब उन्हें मौका देते हुए बहाल करने का फैसला लिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है, जिसमें कामकाज को सुचारु करना और जनता को राहत देना प्रमुख है।

प्रशासनिक कामकाज पर पड़ेगा असर

सरकार के इस फैसले से उम्मीद की जा रही है कि रुके हुए सरकारी काम तेजी से शुरू हो जाएंगे। खासकर जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में लंबित फाइलों का निपटारा संभव हो सकेगा। जनगणना जैसे बड़े कार्य में भी अब तेजी आने की संभावना है, जो राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it