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बिहार के मंत्री ने ऑनलाइन 'कॉकरोच जनता पार्टी' के चलन पर साधा निशाना

बिहार में इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है

बिहार के मंत्री ने ऑनलाइन कॉकरोच जनता पार्टी के चलन पर साधा निशाना
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पटना। बिहार में इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। बिहार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस ऑनलाइन अभियान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इससे जुड़े लोगों को दिशाहीन बताते हुए कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए कोई सकारात्मक योगदान नहीं दे रहे हैं।

कटिहार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा इस तरह की गतिविधियों के जरिए देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत का लोकतंत्र इतना मजबूत है कि इस तरह के ट्रेंड या अभियानों से उसे कमजोर नहीं किया जा सकता।

अपने बयान में मंत्री ने विवादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ऐसे लोगों की तुलना 'कॉकरोच' और 'चूहों' से की। उन्होंने कहा कि इस तरह के लोग भारतीय लोकतंत्र को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

दरअसल, 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का यह ऑनलाइन ट्रेंड 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई के बाद चर्चा में आया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार युवा, जो पेशेवर रूप से खुद को स्थापित नहीं कर पाते, वे कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं।

इस टिप्पणी को लेकर बाद में काफी आलोचना हुई, जिसके बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया।

इसके अगले दिन अभिजीत डिपके नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने एक्स प्लेटफॉर्म पर कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' के लिए गूगल फॉर्म शेयर कर लोगों से रजिस्ट्रेशन करने की अपील की। शुरुआत में यह इंटरनेट मजाक और व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह बेरोजगारी, राजनीति और व्यवस्था पर लोगों की नाराजगी और तंज का बड़ा प्रतीक बन गया।

इसी दौरान दिलीप जायसवाल ने पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा के दौरान गोहत्या पर सख्त रोक लगाने की मांग को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गाय का विशेष धार्मिक महत्व है और वह गोसंरक्षण के पक्ष में हैं।

मंत्री के इन दोनों बयानों के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।


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