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बिहार: नवादा के मंदिर से 18 दुर्लभ पांडुलिपियां मिली, डिजिटाइजेशन शुरू

बिहार के नवादा जिले में एक प्राचीन मंदिर से 18 दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है, जिससे पूरे इलाके में उत्सुकता और उत्साह का माहौल है

बिहार: नवादा के मंदिर से 18 दुर्लभ पांडुलिपियां मिली, डिजिटाइजेशन शुरू
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पटना। बिहार के नवादा जिले में एक प्राचीन मंदिर से 18 दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है, जिससे पूरे इलाके में उत्सुकता और उत्साह का माहौल है। यह महत्वपूर्ण खोज वारिसलीगंज प्रखंड के चांदीपुर गांव स्थित एक पुराने मंदिर में की गई।

यह खोज केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत की गई है और इन पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, ये पांडुलिपियां चांदीपुर गांव के ऐतिहासिक श्री ठाकुर राधा रमण लाल जी मंदिर से बरामद की गई हैं, जिसका निर्माण 1883 में हुआ था।

शनिवार को डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर नीलिमा साहू के नेतृत्व में किए गए निरीक्षण के दौरान विस्तृत सर्वेक्षण में 18 हस्तलिखित और ब्लॉक प्रिंटेड पांडुलिपियां मिलीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये पांडुलिपियां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं और भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा की झलक पेश करती हैं।

सभी पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम’ के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत कर लिया गया है। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यह पहल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

‘ज्ञान भारतम मिशन’ का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित करना है। इनमें से कई पांडुलिपियां ताड़ के पत्तों, भोजपत्र, कपड़े और नाजुक कागज पर लिखी गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पांडुलिपियों में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा, साहित्य और दर्शन, खगोल विज्ञान और विज्ञान के साथ-साथ स्थानीय इतिहास से जुड़ी बहुमूल्य जानकारी होती है।

सरकार आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से इन ग्रंथों का डिजिटाइजेशन कर उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह में शामिल करने की योजना बना रही है, ताकि शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए इन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मौजूदा संरक्षकों के पास ही रहेगा, जबकि सरकार केवल वैज्ञानिक तरीके से उनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास भी ऐसी कोई पांडुलिपि है, तो उसकी जानकारी दें, ताकि देश की इस विरासत को सुरक्षित किया जा सके।

चांदीपुर से मिली ये 18 पांडुलिपियां सिर्फ ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत की जीवंत पहचान हैं। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत इनके संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण भंडार तैयार होगा।


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