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बिहार में रास्ते में एंबुलेंस का तेल खत्म, दो घंटे तड़पकर मरीज ने तोड़ा दम

यह घटना सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग पर मतासी गांव के पास हुई। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस सदर अस्पताल से दोपहर 1:11 बजे पटना के लिए रवाना हुई थी। महज 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद, करीब 1:40 बजे वाहन का ईंधन खत्म हो गया।

बिहार में रास्ते में एंबुलेंस का तेल खत्म, दो घंटे तड़पकर मरीज ने तोड़ा दम
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जमुई : बिहार के जमुई जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। यहां 102 एंबुलेंस सेवा की कथित लापरवाही के कारण एक बुजुर्ग मरीज की जान चली गई। जानकारी के अनुसार, 75 वर्षीय धीरज रविदास को जमुई सदर अस्पताल से बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। लेकिन रास्ते में ही एंबुलेंस का ईंधन खत्म हो गया, जिससे मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सका और उसने दम तोड़ दिया।

रास्ते में ही थम गई जिंदगी की रफ्तार

यह घटना सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग पर मतासी गांव के पास हुई। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस सदर अस्पताल से दोपहर 1:11 बजे पटना के लिए रवाना हुई थी। महज 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद, करीब 1:40 बजे वाहन का ईंधन खत्म हो गया। भीषण गर्मी के बीच एंबुलेंस सड़क किनारे खड़ी रह गई और मरीज को करीब दो घंटे तक उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। अंततः गुरुवार अपराह्न 3:31 बजे मरीज की मौत हो गई।

लापरवाही और अनदेखी

मृतक के पुत्र अजीत रविदास ने एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली जेन प्लस कंपनी और चालक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चालक ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। परिजनों के अनुसार, चालक बार-बार यह कहकर टालता रहा कि थोड़ी देर में तेल आ जाएगा, जबकि वह खुद इधर-उधर ऑटो से आता-जाता रहा। परिजनों का यह भी कहना है कि उनके पास पैसे थे, जिससे तत्काल ईंधन भरवाया जा सकता था, लेकिन चालक ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी और समय यूं ही गुजरता रहा। इस देरी ने मरीज की हालत को और गंभीर बना दिया।

भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें

घटना के दौरान इलाके में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच था। एंबुलेंस का ईंधन खत्म होने के साथ ही उसका एसी और अन्य जरूरी उपकरण भी बंद हो गए। ऐसी स्थिति में मरीज को न तो ठंडक मिल सकी और न ही आवश्यक चिकित्सा उपकरणों का लाभ। इससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। बताया गया कि मरीज को सिर में ब्लड जमा होने की समस्या थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल उच्च स्तरीय इलाज की जरूरत थी।

घटना के बाद की स्थिति

मरीज की मौत के बाद दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, जिसके जरिए शव को वापस जमुई सदर अस्पताल लाया गया। इस घटना ने न केवल परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कंपनी का पक्ष

एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली जेन प्लस कंपनी के जिला क्लस्टर लीडर नीतीश कुमार ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि चालक को भारत पेट्रोलियम का कार्ड दिया गया था और उसी के माध्यम से ईंधन लेने का प्रावधान है। उनके अनुसार, संबंधित पेट्रोल पंप पर ईंधन उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

प्रशासन का रुख

सिविल सर्जन अशोक कुमार सिंह ने इस घटना को गंभीर लापरवाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस में ईंधन खत्म होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, चालक को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि वाहन में पर्याप्त ईंधन हो, खासकर तब जब मरीज को दूसरे शहर रेफर किया जा रहा हो। उन्होंने मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

व्यवस्था पर उठते सवाल

यह घटना राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। एंबुलेंस जैसी महत्वपूर्ण सेवा में इस तरह की चूक न केवल लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सिस्टम में निगरानी और प्रबंधन की कमी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित वैकल्पिक व्यवस्था और स्पष्ट प्रोटोकॉल होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी परिस्थिति में मरीज की जान को जोखिम में न डाला जाए।


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