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लालू-राबड़ी की सुरक्षा में कटौती पर भड़के आलोक मेहता, बोले- सत्ता किसी की जागीर नहीं

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक आलोक मेहता ने पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा

लालू-राबड़ी की सुरक्षा में कटौती पर भड़के आलोक मेहता, बोले- सत्ता किसी की जागीर नहीं
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पटना। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक आलोक मेहता ने पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। सत्ता किसी की जागीर नहीं है।

आलोक मेहता ने कहा कि बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक गरीबों और वंचित वर्गों के हित में काम किया, उन्हें आज राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और सरकार के अन्य नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का पूरा ध्यान राजनीतिक लाभ लेने पर केंद्रित है। उनके अनुसार, रोजाना यह तय किया जाता है कि किसके खिलाफ कार्रवाई करनी है, किस पर प्राथमिकी दर्ज करनी है और किसे राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाना है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लोगों को उनकी राजनीतिक हैसियत और सत्ता से नजदीकी के आधार पर सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं का जनाधार सीमित है, उन्हें भी विशेष सुरक्षा दी जा रही है, जबकि दो-दो बार मुख्यमंत्री रह चुके नेताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा।

आलोक मेहता ने विधानसभा और लोकतांत्रिक परंपराओं के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी गरिमा और महत्ता होती है। सदन में विपक्ष के नेता का सम्मान भी उतना ही होना चाहिए जितना सरकार के नेता का होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेताओं के बीच संवाद और सम्मान की परंपरा भारतीय लोकतंत्र की पहचान रही है, लेकिन वर्तमान समय में इन मूल्यों की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विमर्श का वातावरण समाप्त करना चाहती है। राजनीतिक शिष्टाचार, संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुले तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है। उनके अनुसार, सत्ता में बैठे लोग ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो शासन उनकी निजी जागीर हो।

आरजेडी विधायक ने लालू परिवार को आवंटित सरकारी आवास खाली कराने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया ऐसा लग रहा है मानो किसी व्यक्तिगत दुश्मनी को साधा जा रहा हो। उन्होंने कहा कि सत्ता किसी की निजी संपत्ति नहीं होती और लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं। जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।

इस दौरान आलोक मेहता ने चर्चित शिक्षक खान सर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और हाल में हुए विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग कभी बिहार में जंगलराज की बात करते थे, वही अब राज्य में उससे भी खराब स्थिति पैदा कर चुकी है।


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