भूपेश पर 30 एकड़ जमीन हड़पने का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर जमीन हड़पने का एक और मामला सामने आया है
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर जमीन हड़पने का एक और मामला सामने आया है।
भिलाई में सकूल के नाम पर बेशकीमती 30 एकड़ जमीन अपने नाम फिर पत्नी के नाम पर करने का आरोप जनता कांग्रेस के नेताओं ने लगाया है।
इस पूरे मामले को तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार के जरिए अंजाम दिया गया। वर्तमान में इस जमीन की कीमत 60 करोड़ बताई जाती है। मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर जमीन को स्कूल के नाम लौटाने मांग की है।
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष धर्मजीत सिंह विधायक आरके राय व विधान मिश्रा ने शुक्रवार को संयुक्त पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
उन्होंने दस्तावेजों सहित मामले का खुलासा करते हुए कहा भिलाई चरोदा में ग्राम शिक्षा समिति भिलाई के द्वारा स्कूल संचालित थी। वर्ष 1980 के बाद स्कूल को साडा में शामिल कर शासकीयकरण कर दिया गया। उस स्कूल की 29 एकड़ जमीन अध्यक्ष ग्राम शिक्षा समिति भिलाई के नाम दर्ज कर दर्ज थी।
गोपनीय तरीके से भूपेश बघेल व नंद कुमार बघेल के नाम पर दर्ज कर दी गई। रिकॉर्ड में लिखा गया है कि लोक अदालत खंडपीठ के प्रकरण क्रमांक 36 अ 94 के अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया है।
लोक अदालत आपसी समझौते के तहत निपटारा करती है सरकारी जमीन का लोक अदालत से कोई वास्ता नहीं और राजस्व रिकॉर्ड में लोक अदालत के आदेश का उल्लेख नहीं किया गया है। बेशकीमती 30 एकड़ जमीन भूपेश बघेल के नाम करने की जानकारी तहसीलदार द्वारा शासन नगर निगम और स्कूल को नहीं दी गई।
भूपेश बघेल उस वक्त पाटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक थे। राज्य का गठन होने के बाद भूपेश बघेल राजस्व मंत्री बन गए उन्होंने बटवारा बता कर यह जमीन अपनी धर्म पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल के नाम स्थानांतरित करवा दी।
शासन, नगर निगम और स्कूल को खबर नहीं- राज्य शासन, भिलाई नगर निगम और उक्त स्कूल के प्रबंधन को नहीं मालूम कि करोड़ों की सरकारी जमीन आखिर भूपेश बघेल के नाम कैसे हो गई। ध
र्मजीत सिंह, विधायक आर के राय के मुताबिक भिलाई नगर निगम ने 9 जुलाई 1999 को संबंधित शाला समिति को एक पत्र भेजा। इसमें लिखा था कि शाला समिति की 29.90 एकड़ जमीन का स्वामित्व अब नगर निगम के पास है। पत्र में यह भी लिखा था कि उक्त जमीन से होने वाली आय से स्कूल का खर्च निकलेगा। राय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भूपेश बघेल ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन अपने नाम करवा ली।
साडा भंग होने के बाद हुआ नामांतरण-विधान मिश्रा ने कहा कि 7 जून 1998 को साडा को भंग किया गया. 8 जून 1998 को भिलाई नगर निगम की स्थापना हुई। साडा के 3 माह के भीतर तहसीलदार से स्कूल की जमीन के नामांतरण की पुष्टि करवा ली गई।
शासन की जमीन बिना राज्य सरकार के कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के बगैर आवंटित नहीं हो सकती. इस तरह पूरा मामला संदेह के दायरे में है। विधान मिश्रा ने कहा की स्कूल की 30 एकड़ जमीन की हेराफेरी के मामले में साडा की भूमिका की जांच होनी चाहिए। क्योंकि वह स्कूल साडा के ही अधीन थी।
यह मामला रसूखदार परिवार से जुड़ा है इसलिए न्यायाधीश राजस्व विभाग व आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से इसकी जांच कराए. साथ ही सरकार तत्काल उस जमीन का अवैध आवंटन निरस्त कर स्कूल के नाम पर दर्ज किया जाए।


