Top
Begin typing your search above and press return to search.

50 हजार करोड़ रुपए का घोटाला

भोपाल ,प्रदेश सरकार ,50 हजार करोड़ रुपए के घोटाले,Bhopal, state government, scams worth Rs 50 thousand crore,

50 हजार करोड़ रुपए का घोटाला
X

भोपाल ! आम आदमी पार्टी ने प्रदेश सरकार पर 6 निजी विद्युत कंपनियों से गैर कानूनी समझौता कर 50 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग करते हुए इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने और समझौते रद्द कर प्रदेश के नागरिकों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है। पार्टी मामले में 27 मार्च सोमवार को भोपाल में एक राज्य व्यापी प्रदर्शन भी करेगी। पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने आज यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली के दाम महंगे होने के कारणों की पड़ताल करने पर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, कि मध्यप्रदेश सरकार ने 6 निजी कंपनियों से गैर कानूनी समझौता कर 50 हजार करोड़ रु. का घोटाला किया है। इन कंपनियों से महंगी बिजली खरीदने के कारण ही आज प्रदेश में बिजली सबसे महंगी है। श्री अग्रवाल ने बताया कि शिवराज सिंह सरकार ने 6 निजी कंपनियों से लगभग 1575 मेगावाट के समझौते किए। ये समझौते गैर कानूनी थे और इन समझौतों में यह शर्त है, कि बिजली खरीदें या न खरीदें निश्चित शुल्क के 2163 करोड़ रुपए 25 वर्ष तक निजी कंपनियों को देने ही पड़ेंगे। उन्होंने बताया, कि 5 जनवरी 11 के किए गए विद्युत क्रय अनुबंध के अनुसार जे पी बीना पावर सागर से 325 मेगावाट के लिए 476 करोड़ रुपए, जे.पी. निगरी जिला सिंगरौली से 396 मेगावाट के लिए 638 करोड़, झाबुआ पावर सिवनी से 180 मेगावाट के लिए 251 करोड़ रुपए, एम.बी. पावर अनूपपुर से 360 मेगावाट के लिए 495 करोड़ रुपए, बी.एल. ए. पावर गाडरवारा से 14 मेगावाट के लिए 21 करोड़ रुपए वार्षिक देने होंगे। इसी तरह 26 नवम्बर 12 को किए गए विद्युत विक्रय अनुबंध के अनुसार सरकार को पीटीसी क माध्सम से लेन्को अमरकंटक को 300 मेगावाट के लिए 282 करोड़ रुपए कुल 1575 मेगावाट के लिए 2163 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष देना होगा।
श्री अग्रवाल का कहना है, कि समझौते प्रतिस्पर्धात्मक बोली के आधार पर होने थे पर इसका खुला उल्लंघन करते हुए 5 कंपनियों के साथ ये समझौते एक ही दिन में 5 जनवरी 2011 को हुए, यह आश्चर्यजनक है, कि समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले दो अधिकारी गजराज मेहता और संजय मोहसे उस दिन संबंधित पद पर पदस्थ ही नहीं थे, और तीन अधिकारियों ए.बी. वाजपेयी, पी.के. सिंह और एन. के भोगल ने एक ही दिन भोपाल में और जबलपुर में समझौतों पर हस्ताक्षर किए, यह साफ बताता है, कि समझौते फर्जी हैं। श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016-17 के आंकड़ोंमें चौंका देने वाले तथ्य सामने आए हैं जिनसे पता चला है, कि जे.पी. बीना पावर से गत 11 महीने में 14.2 करोड़ यूनिट के लिए लगभग रु. 478.26 करोड़ का भुगतान किया जिससे औसत बिजली दर 33.68 रु./यूनिट पड़ी, इसीप्रकार झाबुआ पाावर से खरीदी गयी 2.54 करोड़ यूनिट के लिए रु. 214.20 करोड़ का भुगतान किया गया जिससे बिजली खरीदी की दर रु. 84.33 करोड़ प्रति यूनिट पड़ी।
आप नेता के अनुसार आज मध्यप्रदेश में आज 17 सौ मेगावाट बिजली उपलब्ध है जबकि अधिकतम मांग 11 सौ मेगावाट है अत: इन निज कंपनियों से बिजली खरीदना पूर्णत: गैर जरूरी है, इन कंपनियों आज 2163 करोड़ का फिक्स चार्ज का भुगतान किया जा रहा है यह सरकार द्वारा किया अवैधानिक अनुबंधनों के कारण अगले 25 वर्ष तक भरना पड़ेगा, जिसके कारण मध्यप्रदेश की जनता का 50 हजार करोड़ रुपया लूट लिया जाएगा।
श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों से अत्यधिक महंगे दामों पर बिजली खरीदी को आसान करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने अपने स्वयं के सस्ते पावर प्लांट या तो बंद कर रखे हैं या आंशिक रूप से चालू रखे हैं। वही बांधों में भरपूर पानी होने के बावजूद बरगी, बाणसागर और गांधी सागर में पर्याप्त पानी होने के बावजूद इनसे न्यूनतम बिजली पैदा की जा रही है। जबकि इनसे बहुत सस्ती बिजली मिलती है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it