भाजीबीनि करे तीन लाख का भुगतान: फोरम
भारतीय जीवन बीमा निगम से जीवन साथी पालिसी के तहत बीमा कराया गया

जांजगीर। भारतीय जीवन बीमा निगम से जीवन साथी पालिसी के तहत बीमा कराया गया, लेकिन पति-पत्नी की मृत्यु उपरांत कंपनी को इसकी सूचना नहीं दी गई। इसी आधार पर बीमा कंपनी राशि का भुगतान करने से इंकार कर रही थी, जिसे उपभोक्ता फोरम ने बीमा राशि का भुगतान करने आदेशित किया है।
उपभोक्ता फोरम में बलौदा निवासी 77 वर्षीय लक्ष्मीनारायण पिता नीलकंठ गुप्ता ने अपनी पांच वर्षीय पोती बृजेश्वरी गुप्ता की ओर से वाद दायर किया कि उसके पुत्र व पुत्रवधु की मृत्यु उपरांत भी भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा बीमा पालिसी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उसके पुत्र दिनेश गुप्ता ने जीवन साथी योजना के तहत 12 अक्टूबर 2010 को 1.50 लाख का पालिसी लिया था। इसके लिए दिनेश ने अपनी पत्नी मंजू को नामिनी बनाया था। बीमा का प्रीमियम लगातार जमा किया जा रहा था। इसी बीच 29 दिसंबर 2011 को दिनेश तथा 25 नवंबर 2011 को मंजू की मौत हो गई।
वे अपने पीछे पिता व पुत्री को छोड़ गए, जिन्हें बीमा पालिसी की कोई जानकारी नहीं थी। वर्ष 2017 में लक्ष्मीनारायण को बीमा की जानकारी होने पर उसने बीमा कंपनी में पालिसी की रकम भुगतान करने आवेदन किया। इसके लिए उसने समस्त औपचारिकता पूरी की, लेकिन बीमा कंपनी की ओर से भुगतान करने हीला-हवाला किया जाता रहा।
लक्ष्मीनारायण ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर भुगतान दिलाने गुहार लगाई। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अनुबंध अनुसार मौत की सूचना तीन वर्ष के भीतर नहीं देने संबंधी पेंच लगाने की कोशिश की।
उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बीपी पांडेय तथा सदस्य मनरमण सिंह ने सुनवाई के बाद पाया कि बीमा पालिसी की रकम भुगतान करने योग्य है। उन्होंने बीमा कंपनी को पालिसी की रकम दो माह के भीतर 3 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही वाद व्यय बतौर दो हजार रुपए भुगतान करने का भी आदेश दिया है।


