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समस्याओं से जूझ रहा बगबुड़ा गांव, सडक़ किनारे गन्दगी से परेशान स्कूली बच्चें

लवन ! बलौदाबाजार जिले के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बगबुड़ा काफी दिनों से मूलभुत समस्याओं से जूझ रहा है। अभी तक जहां हर तरफ विकास की अलख जगाने की बात आती है,

समस्याओं से जूझ रहा बगबुड़ा गांव,  सडक़ किनारे गन्दगी से परेशान स्कूली बच्चें
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लवन ! बलौदाबाजार जिले के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बगबुड़ा काफी दिनों से मूलभुत समस्याओं से जूझ रहा है। अभी तक जहां हर तरफ विकास की अलख जगाने की बात आती है, वही ग्राम बगबुड़ा निरंतर अधंकार की चपेट में आता जा रहा है। ग्राम बगबुड़ा विकास से कोसो दूर है यहां कुछ-कुछ कामों को छोडक़र अभी तक गली मार्गो को क्र्रांक्रीटीकरण नहीं कराया गया है। स्कूली बच्चे कीचड़ भरी मार्ग से स्कूल जाने को विवश है कई नन्हें बच्चे जो छोटे तबके है वह उसी मार्ग पर गिर भी जाता है जिससे उनका स्कूली डेऊस तो गंदा होता ही है साथ में उस दिन की पढ़ाई भी उसका नुकसान हो जाता है। वही हर तरफ स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है परन्तु यह गांव स्वच्छता से काफी दूर है, रोड किनारे गंदगी फैली हुई है। गांव की अधिकांश गलियां गंदे पानी से तर बतर रहती है। ग्राम पंचायत के सरपंच एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक इस संबंध में गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिस कारण गंदगी का स्तर दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। गांव में विकास की अलख जगाना छोड़ जन प्रतिनिधि गहरी नींद में सोए हुए है यही वजह है कि ग्राम बगबुड़ा विकास से पिछड़ता जा रहा है। कई वर्षो से यह गांव सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। गांव में पानी की किल्लत बनी रहती है कई हेण्डपम्प ऐसे है जो सुखा पड़ा हुआ है। वही गलियों में साल के आठ माह तक गली कीचड़ से भरी रहती है। गलियों में कीचड़ होने के बाद भी न तो कांक्रीटीकरण कराया जा रहा है और न नाली निर्माण किया गया है। नाली निर्माण नहीं होने से घरों से निकला गंदा पानी गली में रूक जाता है जिससे रहवासियों को आने-जाने में परेशानी होती है।
ठंड में ही गहराने लगा पेयजल संकट
समीपस्थ ग्राम पंचायत खैंदा में इन दिनों पेयजल की संकट बनी हुई है। सुबह से ही महिलाओं की लम्बी कतारें लगने लगी है। महिलाएं सब काम छोडक़र पहले पानी का इंतजाम करती है जिससे उनका दैनिक कार्य प्रभावित हो रहा है। कहने को तो गांव में पानी टंकी बनी हुई है लेकिन पानी की आपुर्ति ठीक से नहीं हो पा रही है। महिलाएं घण्टों पानी की इंतजार करते देखे जा सकते है। वही पानी भरने की जगह कीचड़ एवं दलदल युक्त होने के कारण महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वही इस संबंध में गांव के जिम्मेदार लोग ध्यान देने के बजाय हाथ पे हाथ धरे बैठे नजर आ रहे है जिसका खामिख्याजा महिलाओं व आम नागरिकों को भोगना पड़ रहा है। वही जब ठंड में ही जल संकट गहराने लगा है तो गर्मियों के दिन में क्या होगा? मिली जानकारी के अनुसार गांव में लगभग 10 हेण्डपम्प है जिसमें मात्र आधे हेण्डपम्प ही चालू है और कई हेण्डपम्प ऐसे जो चालू तो है लेकिन पानी पीने युक्त न होने के कारण लोग उसका उपयोग नहीं करते है।
गांव की अधिकांश महिलाएं नल-जल योजना से बनी पानी टंकी पर ही निर्भर रहती है।


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