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रेरा की कारवाई के बाद भी हितग्राही हताश

ग्राम एवं नगर निवेश विभाग से अनुमोदित कालोनियों में वादा खिलाफी और धोखाधड़ी को लेकर बीते 25 दिनों में 25 बड़े बिल्डरों के खिलाफ रेरा में शिकायतें पहुंची हैं

रेरा की कारवाई के बाद भी हितग्राही हताश
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रायपुर। ग्राम एवं नगर निवेश विभाग से अनुमोदित कालोनियों में वादा खिलाफी और धोखाधड़ी को लेकर बीते 25 दिनों में 25 बड़े बिल्डरों के खिलाफ रेरा में शिकायतें पहुंची हैं। इसमें हाऊसिंग बोर्ड भी शामिल है। एक ही बिल्डर के खिलाफ दो से तीन शिकायतें भी शामिल हैं। जुलाई में ही 20 से अधिक मामलों पर सुनवाई हुई है। कई मामलों में जहां रेरा ने बिल्डरों को कड़ी फटकार लगाई है, वहीं कई मामलों में आवेदकों और सोसायटी को निराशा हाथ लगी है।

आवेदकों का कहना है कि बिल्डर ने वादाखिलाफी की है। जैसा ब्रोशर में बताया गया, वैसा बनाया नहीं गया। यह शिकायतें ग्राम एवं नगर निवेश विभाग और रेरा से रजिस्टर्ड बिल्डरों के खिलाफ आ रही है। यह शिकायतें उन बिल्डरों के खिलाफ भी हैं, जिन्होंने 50 से ज्यादा एकड़ में प्लाटिंग की है।

मठपुरैना स्थित सिमरन सिटी के खिलाफ भी रेरा में मामला पहुंचा है। सोसायटी के अध्यक्ष नवीन सोनी, उपाध्यक्ष पवन गुप्ता, सदस्य राजेंद्र ठाकुर, दीपक बिश्वास, संजय गुप्ता ने कहा कि बिल्डर ने कवर्ड कैंपस का वादा किया था, लेकिन फेस-1 से लेकर फेस-5 तक विवाद जारी है। मकान और फ्लैट लेते समय यहां कवर्ड कैंपस का वादा किया गया था, लेकिन मिला नही।

कालोनी में जगह-जगह बाउंड्रीवाल अधूरी है, जिसकी वजह से कालोनी का रास्ता अब आम रास्ता बन चुका है, जिसमें ईडब्ल्यूएस के लोगों के साथ ही दूसरी कालोनी के लोग आना-जाना कर रहे हैं। कालोनी के भीतर नालियों को भी दूसरी नालियों से जोड़ दिया गया है। रेरा में इस मामले में कालोनीवासियों ने याचिका दायर की थी। रहवासियों का कहना है कि रेरा में प्रकरण दाखिल किया गया था, लेकिन मौके पर जांच-पड़ताल किए बिना रेरा ने बिल्डर को क्लीनचिट दे दी।

8.50 लाख जमा किया, फिर भी हाउसिंग बोर्ड ने नहीं की रजिस्ट्री

शांति नगर निवासी प्रीति सिंह के मामले में रेरा ने 12 जुलाई को जारी आदेश के मुताबिक, हाउसिंग बोर्ड को कड़ी फटकार लगाते हुए छह माह के भीतर फ्लैट की रजिस्ट्री कराने का आदेश दिया है। प्रकरण के मुताबिक आवेदिका ने प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 10 नवंबर 2016 को नवा रायपुर के सेक्टर-13 में फ्लैट की बुकिंग कराई थी एवं बैंक से लोन लेकर वर्ष-2018 तक किस्तों में राशि का भुगतान कर दिया गया। इसके बाद जुलाई-2022 तक हाउसिंग बोर्ड ने न तो रजिस्ट्री की और न ही आधिपत्य सौंपा बल्कि फ्लैट की जगह भी बदल दी गई। सुनवाई के दौरान रेरा ने हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दिया कि वादे के मुताबिक आवेदिका को फ्लैट का आधिपत्य सौंपा जाए।

कमल विहार में नहीं मिला फ्लैट

रेरा में निजी रियल एस्टेट घरानों के साथ शासकीय एजेंसी से भी लोगों को निराशा हाथ लग रही है। 27 जुलाई को दिए गए फैसले के मुताबिक मोवा निवासी दिलशाद कौशर ने रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की योजना के मुताबिक कमल विहार सेक्टर-4 में 2 बीएचके फ्लैट के लिए अनुबंध किया था, जिसमें आठ लाख रुपये की राशि 10 जुलाई 2020 को किस्तों में भुगतान कर दिया गया।लेकिन कमल विहार में आज तक फ्लैट का आधिपत्य नहीं सौंपा गया, जबकि आरडीए को अनुबंध के मुताबिक मार्च-2021 तक आधिपत्य सौंपना था। रेरा में सुनवाई के दौरान आरडीए को निर्देश दिया गया कि छह महीने के भीतर आवेदिका को निर्माण कार्य पूर्ण कर विधिवत फ्लैट का आधिपत्य प्रदान करें।


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