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भीषण गर्मी में स्कूली बच्चे पड़ रहे बीमार, पालक भी परेेशान

बेमेतरा ! कागजो पर तैयार की गई योजना तब तक धरातल पर नहीं आ सकता जब तक उसके लिये पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था न कर दी जाये।

भीषण गर्मी में स्कूली बच्चे पड़ रहे बीमार, पालक भी परेेशान
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स्कूल जाना-आना बच्चों की कठिन परीक्षा
बेमेतरा ! कागजो पर तैयार की गई योजना तब तक धरातल पर नहीं आ सकता जब तक उसके लिये पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था न कर दी जाये। साथ ही उसे क्रमबंद्व अमली जाता पहनाने पर ही सार्थक परिणाम की उम्मीद की जाकर कोई योजना प्रभावी व सफल मानी जाती है लेकिन षिक्षा विभाग द्वारा विगत वर्ष से प्रांरभ किये गये नई शिक्षा सत्र के दुसरे साल मे जिस तरह की खामियां सामने आ रही है उस पर अब सवाल उठने लगा है नवीन शिक्षा सत्र को लेकर उच्च अधिकारी गंभीरता से ध्यान नही देंगे, ऐसे सवालो का उठाना लाजिमी होगा।
विदित हो कि इन स्कुलो मे विद्यार्थियो की उपस्थिति चाहे 20 से 30 प्रतिषत उपस्थिति है लेकिन मध्यान्ह भेाजन के नाम से 40 से 50 प्रतिशत तक दर्शा रहे है। वैसे भी इस भीषण गर्मी की वजह से जो भी विद्यार्थी स्कूल पहुुचते है वे भेाजन पश्चात घर वापस चले जाते है जानकारी के अनुसार 5 वीं व 8वीं मे किसी बच्चे को फेल करना नही है तो फिर उनके परीक्षा परिणाम मे अनावश्यक विलंब क्यो किया गया। अच्छा तो यह होता कि स्कूल स्तर पर ही परीक्षा परिणाम को घोषित करना चाहिए था। एक तरफ एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हो जाता है इसलिए 10वीं के परीक्षा परिणाम को भी शीघ्र घोषित किया जाना चाहिए था। ताकि पास होने वाले विद्यार्थियीगण अपनी पंसद व मेधानुसार 11वीं की क्लास मे प्रवेश लेकर अध्ययन कार्य मे जुट जाते है परिणाम की घोषणा मे जितना ही विंलब होगा उतनी ही नये कक्षा मे प्रवेश लेने पर हिचकिचाहट बनी रहेगी। जिससे उनके पढाई का बडा नुकसान होगा। 6वीं ्र 9वीं ्र 11वीं कक्षाओ मे पास होकर आने वाले विद्यार्थी पढने के मामले मे पीछे हो जायेगे। इन विद्यार्थियो के बारे मे उच्चाधिकारियो को न सिर्फ सोचना चाहिये बल्कि स्कूल प्रबंधन मे कैसे व्यवस्था है इसे भी देखना उतना ही महत्वपूर्ण है।
गर्मी में झुलस रहे बच्चें ्र स्कूल में पंखा भी नही
चिलचिलाती धूप मे साथ शरीर को चुभने वाली भीषण गर्मी व लू के थपेडे के बीच नन्हे ्र मुन्ने विद्यार्थी स्कूल मे अध्ययन करने पहुचते है वही स्कूलो मे शरीर मे पसीने से राहत देते हेतू ऐसी कोई व्यवस्था नजर भी नही आती। कतिपय स्कूलो मे तो गर्म हवा ही सही ्र पंखा की व्यवस्था भी विद्यार्थियो को नसीब नही होती। हालांकि गर्म हवा सह पाने की छोटे बच्चो मे क्षमता कम होती है दुसरी तरफ खिडकियो से भीतर पहुंचने वाली लु की हवाओ भी विद्यार्थियो के बैठने की सहन शक्ति की परीक्षा लेने आतुर रहती है। ऐसी विशम स्थिति मे पढने के लिए स्कूल आने की अपेक्षा घर मे समय बिताना उचित समझ रहे है। उसमे उनके पालक भी सहमत होते है।


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