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विपक्षी पार्टियों का एक होना पीएम मोदी की राजनीतिक ताकत का संकेत: स्मृति ईरानी

 केंद्रीय मंत्री और फायरब्रांड महिला भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने आज कहा कि विपक्षी पार्टियों का एक होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और उनकी राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा संकेत है

विपक्षी पार्टियों का एक होना पीएम मोदी की राजनीतिक ताकत का संकेत: स्मृति ईरानी
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अहमदाबाद। केंद्रीय मंत्री और फायरब्रांड महिला भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने आज कहा कि विपक्षी पार्टियों का एक होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और उनकी राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा संकेत है।

ईरानी ने कहा कि विपक्षी एकता के बावजूद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा नीत राजग बहुमत के साथ चुनाव जीतेगा।

ईरानी ने मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियां साझा करने के लिए यहां जीएमडीसी सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘विपक्षी पार्टियों का एक होना देश के नागरिकों को संदेश है कि ये दल अपने स्वार्थ और खुद को किसी तरह बचाये रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। इसमे जनता के लिए यह भी संदेश है कि सभी विपक्षी दलों में यह दमखम नहीं है कि वे अकेले केवल अपनी विचारधारा, नीति-कार्यक्रम अथवा नेता के दम पर हिन्दुस्तान का दिल जीत सकें।’

उन्होंने कहा, ‘विपक्ष का एक होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता तथा उनकी राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा संकेत और उदाहरण है। ऐसा कर उन्होंने यह मान लिया है कि उनमें प्रधानमंत्री का अकेले मुकाबला करने का दम नहीं है।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्हाेंने कहा कि विपक्षी दलों के प्रयासों के बावजूद 2014 में श्री मोदी की अगुवाई में भाजपा नीत राजग की जीत हुई थी और 2019 में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुख्य चुनावी मुद्दा विकास ही रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा प्रमुख ने साफ तौर पर कहा है कि पार्टी शिवसेना के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।

पेट्रोल डीजल की कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती ईरानी ने कहा कि इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने से राहत मिल सकती है पर यह फैसला केंद्र अकेले नहीं ले सकता। उन्होंने कीमत में बढ़ोत्तरी के लिए पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ओपेक की ओर से उत्पादन में कटौती के निर्णय को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में हर साल औसतन पेट्रोल की कीमत चार रूपये प्रति लीटर बढ़ती थी और यह भाजपा नीति राजग सरकार के दौरान मात्र एक रूपया प्रति लीटर है।


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