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करंट से भालू की मौत

करीब सप्ताह भर पूर्व खरसिया रेंज के बसनाझर क्षेत्र में एक भालू की मौत हो गई थी

करंट से भालू की मौत
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रायगढ़। करीब सप्ताह भर पूर्व खरसिया रेंज के बसनाझर क्षेत्र में एक भालू की मौत हो गई थी। इस मामले में ग्रामीण भालू की मौत शिकारियों के द्वारा जंगली सुअर को मारने के लिए बिछाए गए करंट तार से होना बता रहे हैं, लेकिन विभाग को मिला पीएम रिपोर्ट में भालू की मौत बीमारी से बता कर मामले को दबा दिया गया। जबकि आज जिला सेव फारेस्ट टीम के द्वारा मौके पर निरीक्षण करने पर उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि भालू की मौत करंट तार से हुई है और मौके पर तार भी मिला था, लेकिन अब मामले में लापरवाह कर्मचारियों को बचाने के लिए प्रकरण ही दबा दिया गया।

जिला सेव फारेस्ट समिति के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल, सचिव मोहसिन खान, सदस्य सुशील पांडे सहित अन्य सदस्य बसनाझर गांव पहुंचे। जहां उन्होंने 17 अगस्त को भालू की मौत के संबंध में ग्रामीणों से चर्चा की, तब उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि बसनाझर गांव के करीब पहाड़ में भालू मौजूद हैं और अक्सर यहां भालू देखा जाता है।


इसके अलावा जंगली सुअर भी काफी मात्रा में यहां हैं, जो गांव के खेतों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में कुछ गांव के शिकारी भी सक्रिय हैं, जो जंगली सुअर को मारने के लिए करंट प्रवाहित तार को नहर किनारे बिछा देते हैं। 17 अगस्त को भी यह हुआ और यहां जंगली सुअर को मारने के लिए करंट प्रवाहित तार को बिछा दिया गया, लेकिन उसमें जंगली सुअर की जगह भालू उसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। सुबह जब आसपास के लोगों ने देखा तो मामले की जानकारी विभागीय कर्मचारियों को दी गई, लेकिन मामले में को पूरी तरह से विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर दबा दिया गया और करंट से हुई भालू की मौत को बीमारी से मौत होना बता कर मामले से इत्तीश्री कर ली गई।
जिला सेव फारेस्ट के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने जब ग्रामीणों से पूछा कि यहां दो-तीन सालों में कितने भालू की मौत हुई, तो पता चला कि लगभग पांच भालूओं की मौत हो चुकी होगी, जबकि इस क्षेत्र में पानी की कोई कमी नहीं है और पानी की कमी से कोई भालू नहीं मरा, पर पूर्व में प्यास से भी भालू मौत होना बता दिया गया। इसके अलावा जिला सेव फारेस्ट समिति के पदाधिकारियों के द्वारा ग्रामीणों से शिकारियों के संबंध में पूछा गया, तो उनका कहना था कि जिस स्थान पर भालू की मौत हुई है। उस क्षेत्र में अक्सर महिलांए व ग्रामीण आना-जाना करता है और ऐसे में कभी भी कोई जनहानि भी हो सकती है और बसनाझर क्षेत्र में शिकारियों की सक्रियता व वनकर्मियों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। विभागीय सूत्रों ने यह भी बताया कि जब भालू की मौत हुई थी, तो उसके पीएम व आगे की कार्रवाई के लिए घरघोड़ा उप वन मंडल कार्यालय से एसडीओ नहीं पहुंचे थे। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के उच्च अधिकारियों का नियत्रंण इस क्षेत्र व यहां के वनकर्मियों पर नहीं है। इस संबंध में सेव फारेस्ट समिति के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल का कहना था कि ग्रामीणों ने बताया कि जब भालू की मौत हुई थी, तो उस दौरान करंट के लिए बिछाए गए तार मौजूद थे। क्षेत्र शिकार किए जाने के कुछ तथ्य देखे गए। मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत की जाएगी, वहीं बसनाझर के बीटगार्ड दीपक दीक्षित ने बताया कि भालू के पीठ में चोट के निशान थे और पीएम रिपोर्ट में बीमारी से भालू की मौत होना बताया जा रहा है। क्वार्टर जर्जर होने के कारण यहां निवासरत नहीं हूं, लेकिन हर दिन अपने मुख्यालय में आता हूं।

मुख्यालय में नहीं रहते वनकर्मी
ग्रामीणों ने बताया कि बीटगार्ड भी यहां मुख्यालय से अक्सर नदारद रहता है। कभी-कभार सिविल ड्रेस में बीटगार्ड आता है और गांव के एक जनप्रतिनिधि व कुछ ग्रामीणों के साथ घूम कर वापस लौट जाता है। बताया जा रहा है कि यहां सरकारी क्वार्टर जर्जर है और उसी का बहाना बना कर वनकर्मी निरंतर जंगल का भ्रमण नहीं करते हैं। इससे शिकारी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।


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