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राज्य शासन,गृह सचिव,डीजीपी बस्तर आईजी,एसपी को नोटिस

बस्तर में फर्जी मुठभेड़ में आदिवासियों की मौत का मामला बिलासपुर ! बस्तर पुलिस द्वारा निर्दोष आदिवासियों को घर से उठाकर ले जाने और नक्सली बताकर फर्जी मुठभेड़ में मौत के घाट उतारने

राज्य शासन,गृह सचिव,डीजीपी बस्तर आईजी,एसपी को नोटिस
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बस्तर में फर्जी मुठभेड़ में आदिवासियों की मौत का मामला
बिलासपुर ! बस्तर पुलिस द्वारा निर्दोष आदिवासियों को घर से उठाकर ले जाने और नक्सली बताकर फर्जी मुठभेड़ में मौत के घाट उतारने के मामले में लगाई गई याचिका पर आज हाईकोर्ट ने राज्य शासन सहित गृह सचिव,डीजीपी,बस्तर आईजी,व कोण्डागांव एसपी को चार सप्ताह में शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार श्रीमती कचरीबाई व कोण्डागांव विधायक मोहन मरकाम ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता सतीशचन्द्र वर्मा के माध्यम से याचिका दायर कर बताया की निर्दोष आदिवासियों को घर से उठाकर पुलिस ले जा रही है और मुठेभेड़ में मौत बता रही है। 24 नवम्बर को कोण्डागांव मरदापाला लखापुरी के रहने वाले बाल सिंह पिता रामाधार को पुलिस घर से ले गई थी और कहा था कि बाल सिंह को छोड़ देंगे। 27 नवम्बर को पता चला कि बाल सिंह की पुलिस मुठभेड़ में हत्या कर दी है। बाल सिंह को अपने साथ ले जाने वाले मनाऊ तथा मेघनाथ को मृतका की पत्नी कचरीबाई अच्छी तरह पहचानती है। पीडि़ता का कहना है कि बाल सिंह कभी भी नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं थे। पूर्व में भी बस्तर क्षेत्र के कई निर्दोष आदिवासियों की हत्या कर दी गई है। याचिकाकर्ता द्वारा पुलिस पर यह आरोप भी लगाया गया है कि बस्तर क्षेत्र के निर्दोष बालक पुनेऊ की भी पुलिस ने हत्या की है। आदिवासी सोनऊ तथा विजऊ की भी पुलिस ने हत्या कर फर्जी एनकाउंटर बता दिया कचरीबाई के पति की भी हत्या की गई है। बाल सिंह को नक्सली मुठभेड़ में मारने की जानकारी पुलिस ने दी है। इसके भी पुलिस द्वारा बाल सिंह के खिलाफ फर्जी मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया था।
इस मामले पर आज हाईकोर्ट ने राज्य शासन सहित गृह सचिव, डीजीपी, आईजी बस्तर व कोण्डागांव एसपी को चार सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।


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