बेरियाट्रिक सर्जरी वजन कम करने का शॉर्टकट नहीं
विश्वभर में मोटापा व उनसे जनित रोग जैसे हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज, प्रसव के बाद उत्पन्न मोटापाए बच्चों में अधिक वजन होना, पेट पर अतिरिक्त चर्बी से 2.7 बिलियन लोग ग्रसित हैं
गाजियाबाद। विश्वभर में मोटापा व उनसे जनित रोग जैसे हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज, प्रसव के बाद उत्पन्न मोटापाए बच्चों में अधिक वजन होना, पेट पर अतिरिक्त चर्बी से 2.7 बिलियन लोग ग्रसित हैं, इसी वजह से विश्व भर में 11 अक्टूबर को विश्व मोटापा दिवस मनाया जाता है। यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाजियाबाद के वरिष्ठ बैरियाट्रिक, लैप्रोस्कोपिक एवं गैस्ट्रो सर्जन डॉय आशीष गौतम ने इस प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि यशोदा हॉस्पिटल बेरियाट्रिक सर्जरी का दिल्ली एनसीआर में एक प्रमुख केंद्र है तथा विगत वर्षा में अनेक मरीजों की सफलता पूर्वक मोटापे की सर्जरी की जा चुकी है।
बेरियाट्रिक सर्जरी महज वजन कम करने का एक शॉर्टकट तरीका नहीं है। यह सर्जरी अधिक मोटापे से छुकारे के साथ मोटापा जनित रोगों जैसे हाइपरटेंशन, मधुमेह, गठिया जैसे रोगों में भी फायदा पहुंचाती है, ऐसा बताते हुए वरिष्ठ बेरियाट्रिक सर्जन डॉ, आशीष गौतम ने कहा मोटापे एवं उसकी वजह से होने वाली बीमारियों के निदान हेतु 15 अक्टूबर को एक विशाल शिविर लगाया जा रहा हैए इस शिविर में दिल्ली एनसीआर की एकमात्र जर्मनी की मशीन से शरीर की आवश्यकता से अधिक वजनए फैट, मोटापे की गणना की जाएगी। अमूमन इस टेस्ट का 5000 रुपये खर्चा आता है, जो नि:शुल्क उपलब्ध रहेगा, साथ ही वरिष्ठ बेरियाट्रिक सर्जन डॉ.आशीष गैतम लोगों को नि:शुल्क परामर्श देंगे। इस कैम्प में मोदीनगर, हापूड़, बुलंदशहर, सिकंदराबाद, अलीगढ़, खुर्जा हाथरस, नोएडा, गाजियाबाद से मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराना शुरु कर दिया है तथा इस कैम्प में भाग भी लेंगे। इस कैम्प में मोटापा व उनसे जनित रोगोंए पेट पर अतिरिक्त चर्बी से बचाव एवं उसके कारणों का निदान कर संपूर्ण समाधान सेवाएं प्रदान की जाएगी। बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि बेरियाट्रिक सर्जरी महज वजन कम करने का एक शॉर्टकट तरीका नहीं है। यह सर्जरी अधिक मोटापे से छुटकारे के साथ मोटापा रोगों जैसे हाइपरटेंशन, मधुमेह, गठिया जैसे रोगों में भी फायदा पहुंचाती है। किसी का वजन ठीक हैए ज्यादा है या बहुत ज्यादा हैए इसकी गणना बॉडी मास इंडेक्स बीएमआई से की जाती है। बॉडी मास इंडेक्स में व्यक्ति की लंबाई और उसके वजन का अनुपात देखा जाता है। जिनका भार स्टैंडर्ड मानक भार से दोगूना होता हैं, उन्हें मोटापे का शिकार माना जाता है। सामान्य से थोड़ा बहुत वजन अधिक होना रोग नहीं है, पर वजन अधिक होने पर सामान्य दिनचर्या को पूरा करने में परेशानी होना समस्या की ओर संकेत करता है।
मोटापा एक गंभीर बीमारी है, जिसके साथ सेहत संबंधी कई अन्य समस्याएं जुड़ जाती हैंए जिनमें मधुमेहए हाइपेरटेंशनए अनिद्राए जोड़ों की समस्याए फैटीलिवर, दमा और कुछ तरह के कैंसर आते हैं। मोटापा सभी अंगों पर नकारात्मक असर डालता हैए जिसे मोटापे का मेटाबॉलिक सिम्प्टम भी कहा जाता है।
क्या है बेरियाट्रिक सर्जरी
बेरियाट्रिक, वेटलॉस या मेटाबॉलिक सर्जरी एक जीवनशैली सुधार सर्जरी है। इससे न सिर्फ शरीर के भार में कमी आती है, बल्कि हार्मोनल प्रभाव के जरिए मोटापे से जुड़ी चिकित्सकीय स्थितियों पर भी नियंत्रण रखा जाता है। अगर किसी को डेफिशिएंसी युक्त मोटापा है या फिर अत्यधिक मोटापे से साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर रोग भी हैं तो उनके लिए यह सर्जरी कराना सही रहता है। यह सर्जरी 18 से 65 वर्ष के उन रोगियों में मोटापा कम करने के लिए की जाती हैए जो डाइटिंगए एक्सरसाइज और व्यवहारगत कोशिश करने के बावजूद वजन कम करने में असफल हो रहे हैं। इससे वजन से साथ मोटापा जनित रोगों में भी राहत मिलती है। महिला रोगी सर्जरी के 18 माह से 2 वर्ष के बाद गर्भधारण कर सकती हैं। 95: रोगियों की जीवनशैली में सुधार आता है व 89: रोगियों में मृत्युदर कम हो जाती है। जल्दी ही आता है परिणाम: बेरियाट्रिक सर्जरी व्यक्ति के शरीर में 5 से 15 मिलिमीटर की रेंज के 4 से छोटे चीरे लगा कर लेप्रोस्कोपिक तरीके से की जाती है। इसमें चीरों के जरिए लेप्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट्सं को शरीर में इसंर्ट किया जाता है। इस सर्जरी के कई तरीके हैंए जिन्हें व्यक्ति की स्थिति के आधार पर अपनाया जाता है। नई स्टेपलिंग डिवाइस आने से यह प्रक्रिया पहले से अधिक सुरक्षित हो गयी है। यह प्रक्रिया किसी अन्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के समान ही हो गयी है। मरीजों को सर्जरी के 2 या 3 दिन के बाद छुट्टी मिल जाती है और ने 6 सप्ताह बाद अधिक श्रम वाले काम भी कर सकते हैं। उल्टीए एनीमियाए गैस की समस्या कुछ समय तक परेशान कर सकती हैए जो समय के साथ ठीक हो जाती है।सर्जरी के बाद आहार ग्रहण करने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों से गुजरती हैए जिसकी शुरुआत तरल आहार से शुरु होकर सेमी सॉलिड एवं पूर्ण आहार तक जाती है। इस प्रक्रिया में 3 से 4 सप्ताह का समय लगता है। सर्जरी के बाद व्यक्ति औसतन 6 से 8 किलोग्राम वजन हर माह कम करता है। मधुमेह में भी उपयोगी: हमारा शरीर रक्त में शर्करा यानी ग्लूकोज से उर्जा गह्रण करता है। मधुमेह उस समय होता हैए जब रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य से ऊपर चला जाता है। मधुमेह रोगी का शरी इंसुलिन बनाने के लिए शर्करा का इस्तमाल करने में सक्षम नहीं होताए जिससे रक्त एवं ऊतकों में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। लिहाजा मधुमेह व उससे जुड़ी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। मोटापे की एक बड़ी वजह बड़ी मात्रा में फास्ट फूड और जंक फूड खाना है। विशेषज्ञों के अनुसार आजकल नमकए चीनी व मैदा तीनों का सेवन अधिक किया जा रहा हैए जो नुकसानदेह है। अधिक कार्बोहाइड्रेट शरीर में शर्करा को बढ़ाता हैए जिससे वसा जमने लगती है। इसे कम करने के लिए खुराक में कार्बोहाइड्रेट के इनटेक को 15 से 45 ग्राम तक कम करना जरूरी है। चिंता की बात यह है कि अब 9 वर्ष की आयु के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बेरियाट्रिक सर्जरी टाइप 2 डायबिटीज में भी राहत देती है। व्यक्ति का वजन नियंत्रित होने के बाद रक्त में शर्करा का स्तर भी सामान्य हो जाता है। व्यक्ति की दवाओं पर निर्भरता कम होती है। व्यक्ति का वजन कम होने पर उसकी गतिशीलता बढ़ती है। शरीर की इंसुलिन निर्माण प्रक्रिया में सुधार होता है।मोटापे के कारण लोग डिप्रेशन के शिकार भी हो जाते हैं। लोगों की सोच नकारात्मक हो जाती है। हर समय दुखी रहते हैं। कभी.कभी तो लोग खुदकुशी की भी कोशिश करते हैं। मोटापे की वजह से आपके आंत की कोशिकाओं पर ज्यादा दबाव होता है।


