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मप्र में 'बैंक-सखियां' बनी घर-घर का बैंक

मध्य प्रदेश में ग्रामीण इलाकों के लोगों को बैंक सुविधाएं देने में बैंक-सखियां बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

मप्र में बैंक-सखियां बनी घर-घर का बैंक
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भोपाल | मध्य प्रदेश में ग्रामीण इलाकों के लोगों को बैंक सुविधाएं देने में बैंक-सखियां बड़ी भूमिका निभा रही हैं। ये बैंक-सखियां ग्रामीण इलाकों में घर-घर पहुंचकर बैंक सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगी हैं। कोरोना संक्रमण काल में बैंकों के खुले होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों से आकर शहरी क्षेत्र के बैंकों में लेन-देन करना एक कठिन काम हो गया है। इस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी-छोटी बचत करने वाले परिवारों को उनके घर पर ही बैंक सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य 652 बैंक-सखियों द्वारा किया जा रहा है। लॉकडाउन अवधि में बैंक-सखियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 62 करोड़ 23 लाख रुपये की राशि संबंधित खातादारों तक पहुंचाई गई है।

ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने बताया, "राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत राज्य के ग्रामीण अंचल में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार-मूलक गतिविधियों से जोड़ा गया है। वर्तमान में प्रदेश में दो लाख 87 हजार से अधिक स्व-सहायता समूहों से 32 लाख 27 हजार महिलाएं बतौर सदस्य जुड़ी हैं।"

उन्होंने बताया कि इन समूहों की पढ़ी-लिखी महिलाओं या उनकी बेटियों को बैंक सखी के रूप में राष्ट्रीयकृत बैंकों से जोड़ा गया है। ये बैंक-सखियां बैंक प्रतिनिधि के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक की रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए अधिकृत की गई हैं।

ये बैंक सखियां घर-घर जाकर ग्रामीणों को उनके घर पर ही बैंक से लेन-देन, खाता खोलने-बंद करने की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। प्रदेश में 652 बैंक-सखियों द्वारा तीन लाख 34 हजार बैंक ट्रान्सजेक्शन के जरिए 62 करोड़ 23 लाख रुपये की राशि संबंधित खातादारों तक पहुंचाई गई।


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