प्राधिकरण को जमीन लौटा रहे हैं बिल्डर,चार बिल्डरों ने प्राधिकरण में किया आवेदन
नोएडा ! प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी (पीएसपी) के तहत बिल्डरों ने प्राधिकरण को अपनी जमीन हैंड ओवर करने का सिलसिला शुरू हो गया है।

नोएडा ! प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी (पीएसपी) के तहत बिल्डरों ने प्राधिकरण को अपनी जमीन हैंड ओवर करने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्राधिकरण के पास चार बड़े बिल्डरों ने जमीन वापस करने के लिए आवेदन किया है।
आवेदकों की संख्या में बढ़ोतरी होना तय है। यह वह जमीन है जिन पर प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया गया है। वहीं, एस्क्रो खाता खुलवाने के लिए भी आवेदन आ रहे है। प्राधिकरण जांच पड़ताल के बाद ही आवेदनों के आधार पर खाता खुलवाएगा। शहर में एक दर्जन सेक्टरों में बिल्डरों के प्रोजेक्ट चल रहे है। यहा करीब एक लाख फ्लैट बनाए जा रहे है। जबकि अधिकांश जमीन बिल्डरों के नाम तो है लेकिन उन पर फ्लैट बनाने या परियोजना शुरू करने का पैसा बिल्डरों के पास नहीं है। आलम यह है कि निवेशकों को फ्लैटों पर कब्जा देने में लगातार देरी हो रही है। इसके इतर जिन सोसाइटी में फ्लैटों पर कब्जा मिल भी गया है वहां सुविधाओं की बेहद कमी है। ऐसे में निवेशकों व बिल्डरों की सहुलियत के लिए प्राधिकरण पीएसपी पालिसी का एक फारमेट तैयार किया। जिसे प्रदेश सरकार ने मंजूरी दी। इसी पालिसी के तहत बिल्डर जमीन प्राधिकरण को वापस कर रहे है। इस चरण में चार बिल्डरों ने प्राधिकरण में आवेदन किया। उधर, करीब एक दर्जन बिल्डर लाइन में खड़े है। जिनको अपनी जमीन प्राधिकरण के अधिनस्त करनी है।
साल 2010 के बाद से रियल एस्टेट में काफी मंदी का दौर देखने को मिल रहा है। बिक्री में काफी कमी आई है। रियल स्टेट कारोबार के इन आकड़ों को देखे तो पता चल जाएगा कि आखिर बिल्डर जमीन प्राधिकरण को देने को क्यो आवेदन कर रहे है। दरसअल, 2010 की बात करें तो उस साल 2 लाख मकानों की बिक्री हुई थी। 2014 में ये बिक्री 1.62 लाख और 2015 में से बिक्री 1.58 लाख रह गई। वहीं, नए फ्लैटों की घोषणा का स्तर पर साल दर साल घट रहा है। 2011 में 3.43 लाख फ्लैट की घोषणा हुई थी। जो आज घटकर 2016 के पहले छह महीनों में 1.07 लाख रह गई है। वहीं, रियल एस्टेट एफडीआई में भारी गिरावट देखने मिली है। जहां वर्ष 2009-10 में एफडीआई का दायरा 13,586 करोड़ रुपए था। वहीं 2015-16 में ये निवेश 727 करोड़ रुपए रह गया। मौजूदा वित्तीय साल के पहले छह माह में रियल एस्टेट कंपनियों पर करीब 59 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। ऐसे में बिल्डर के पास पैसा नहीं है और निवेशकों को उनका आशियना मिल नहीं पा रहा।
प्रतिदिन प्राधिकरण के चक्कर काट रहे निवेशक
जिन सोसायटी में बिल्डर ने निवेशकों को कब्जा दे दिया है। वहां सुविधाओं का आभाव है। ऐसे में वह प्रतिदिन प्राधिकरण के चक्कर काट रहे है। सुविधाओं को लेकर कई बार बैठके भी हो चुकी है। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। फिलहाल प्राथमिकता ऐेसे बिल्डरों पर सख्ती करने की है जिनके फ्लैटों में निवेशक रह रहे है लेकिन सुविधाओं का भारी अभाव है।


