Top
Begin typing your search above and press return to search.

यह मिस्टर सिस्टम कौन हैं?

यह मिस्टर सिस्टम कौन हैं? संसद में सवाल लगाया जाना चाहिए! अभी 28 जनवरी से बजट सत्र शुरू हो रहा है

यह मिस्टर सिस्टम कौन हैं?
X

अब जब संविधान बदलने की बात हो रही है तो उसमें सबसे ऊपर कर्तव्य रखे जाएंगे। और उन्हें ज्यादा वज़न देने के लिए जन्मजात कर्तव्य कह दिया जाएगा। तो वह कर्तव्य करे, सरकार उसका फायदा उठाए, अधिकार साहब को और ताकतवर बनाए और उस की जब कोई समस्या आए तो उसका दोष सिस्टम का बता दिया जाए।

यह मिस्टर सिस्टम कौन हैं? संसद में सवाल लगाया जाना चाहिए! अभी 28 जनवरी से बजट सत्र शुरू हो रहा है। उसमें सरकार से पूछा जाना चाहिए कि अगर हर समस्या, मौत का दोषी यह सिस्टम है तो इसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है?

अभी नोएडा में एक युवा इंजीनियर युवराज की कार सड़क किनारे खोदे गए गड्डे में चली गई। वह दो घंटे तक संघर्ष करता रहा सड़क पर तमाम सरकारी एजेंसियों के अधिकारी, पुलिस, फायर ब्रिगेड खड़े रहे। मध्यमवर्गीय जनता वीडियो बनाती रही। युवराज का पिता वहां अपने लड़के को बचाने की गुहार लगाता रहा। पानी में कार की छत पर युवराज खुद सहायता के लिए चिल्लाता रहा। मगर कोई मशीन, क्रेन, बुलडोजर नहीं आया। एक आम आदमी मुनीन्द्र पानी में उतरा। मगर अकेला था बिना किसी की मदद के कुछ नहीं कर पाया।

बाद में पुलिस ने उसी से पूछताछ की पांच घंटे थाने में बिठाए रखा। अभी भी एसआईटी कर रही है। हद है। हर जगह आम आदमी के साथ यही होता है। और हर बार वह गरीब सबकी सहायता करने के लिए दौड़ता है। मगर वही गरीब सरकार से लेकर बड़े लोगों के निशाने पर हमेशा रहता है। उसका हर दुर्घटना में बिना अपनी जान की परवाह किए मदद के लिए भागना उसका कर्तव्य माना जाता है। यह जो आजकल प्रधानमंत्री मोदी जी रोज कर्तव्य का पाठ पढ़ाते हैं वह उसी के लिए होता है। वह कभी अपना सबक भूले नहीं इसीलिए सड़क का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया, कर्तव्य भवन बना दिया। एक दिन आम आदमी का नाम कर्तव्य कुमार रख दिया जाएगा। जैसे अभी बजट में कह सकते हैं कि यह बजट हम कर्तव्य कुमार के लिए लाए हैं। जबकि होगा वह अधिकार साहब ( अडानी अंबानी) के लिए। गरीब और अमीर के कार्य निर्धारण अब स्पष्ट हो गए हैं। गरीब का काम कर्तव्य करना और अमीर का अधिकार भोगना।

2014 के बाद की यही उपलब्धि है। कर्तव्य कु मार, अधिकार साहब और मिस्टर सिस्टम। पहले गरीब के अधिकारों की ज्यादा बात होती थी। अभी जब आप यह पढ़ रहे होंगे तो गणतंत्र दिवस होगा 26 जनवरी। इसी दिन संविधान लागू हुआ था। जिसका सबसे महत्वपूर्ण अध्याय मौलिक अधिकार है। अंग्रेजी में और ज्यादा वजनदार शब्द है फंडामेंटल राइट्स।

अब जब संविधान बदलने की बात हो रही है तो उसमें सबसे ऊपर कर्तव्य रखे जाएंगे। और उन्हें ज्यादा वज़न देने के लिए जन्मजात कर्तव्य कह दिया जाएगा। तो वह कर्तव्य करे, सरकार उसका फायदा उठाए, अधिकार साहब को और ताकतवर बनाए और उस की जब कोई समस्या आए तो उसका दोष सिस्टम का बता दिया जाए।

ढूंढता रहे वह सिस्टम को। और फिर समझ ले कि नियति और सिस्टम एक ही है। नियति से कौन लड़ सकता है? तो सिस्टम से भी कौन लड़ सकता है? दोनों अदृश्य हैं। अमूर्त हैं। जनता को केवल उन्हें स्वीकारना है।

बुलडोजर क्रेनें दूसरी बड़ी-बड़ी मशीनें आदमी की मदद के लिए बनी थीं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, उनमें रखी हुई बड़ी बड़ी सीड़ियां। मगर अब विध्वंस के लिए उपयोग होती हैं। मशीनों ने आदमी को बचाना छोड़ दिया। इसीलिए उस रात नोएडा में युवराज को बचाने के लिए किसी मशीन का उपयोग नहीं किया गया। हां अगर वहां कुछ बरबाद करना होता तो देखते किस तरह बुलडोजरों को उपयोग में लाया जाता।

नोएडा की घटना कोई पहली नहीं है जहां सारा दोष सिस्टम पर मढ़कर जनता को यह समझने ही नहीं दिया गया कि गलती किसकी है। इससे पहले इंदौर में दूषित पानी पीकर 27 लोग मर चुके हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। लोग बीमार हैं। सारा दोष यहां भी सिस्टम का है। उचित इलाज मिल नहीं रहा। और यहां तो एक ऐसा कारनामा हुआ जो अपने आप में अनोखा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मीडिया पूछता है आप क्या आर्थिक मदद करेंगे? इन्दौर में जिस इलाके भगीरथपुरा में हुआ वहां का विधायक सत्तारुढ़ पार्टी भाजपा का। कैलाश विजयवर्गीय। राज्य सरकार में मंत्री हैं। वहां पत्रकार से कहते हैं फालतू सवाल मत पूछो। पत्रकार कहता है मैं वहां होकर आया हूं। तो कहते हैं घंटा होकर आए हो।

तो विधायक उनका। इन्दौर का सांसद उनका। शंकर लालवानी। मगर इन्दौर में कहा जा रहा है कि वह इतने लोगों के मर जाने के बाद भी भगीरथपुरा गए ही नहीं। सांसद परिवारों का सांत्वना देने भी न जाए? कई तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में किसी को उनकी मर्जी के बिना जाने की अनुमति नहीं है। खुद सांसद डरे हुए हैं। नहीं डरीं तो सुमित्रा महाजन जिन्हें हटाकर ही लालवानी को लाया गया था। उन्होंने कहा कि राहुल को आना चाहिए। नहीं तो मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक राहुल के आने का विरोध कर रहे थे।

तो हम बता रहे थे कि विपक्ष से पूछा जा रहा है पैसे दोगे? और राहुल गांधी ने पैसे दिए। प्रत्येक मृतक के परिवार को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए। कितने इंजन की सरकार हैं वहां? विधायक, सांसद, इन्दौर का मेयर पानी जिसकी जिम्मेदारी में आता है, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री सब उनके। और पैसा विपक्ष का नेता राहुल गांधी देता है। एक बार भी भाजपा के इतने इंजन हैं वहां किसी से यह नहीं कहा गया कि आप क्यों देंगे। जितनी जरूरत होगी हम देंगे।

नहीं यह तो किसी ने नहीं कहा। बस राहुल क्यों आए हैं जैसे सवाल करते रहे। किसी को जवाब देना था यह पैसे देने आए हैं। अगर आप सब कुछ देखते तो नेता प्रतिपक्ष से कौन पैसे मांगता है? मगर यह अनोखी घटना भी इनके राज में हुई कि नेता प्रतिपक्ष से पैसे मांगे जाते हैं और वह देता है।

क्योंकि दोषी कोई मिस्टर सिस्टम है। उससे कौन ले? सरकार तो दोषी है नहीं। कोविड में भी सिस्टम ही दोषी था। अब दो ही लोग दोषी होते हैं। एक मिस्टर सिस्टम और दूसरे खुद पीड़ित। अभी युवराज के मामले में भी कोशिश की गई कि वह पार्टी में था। होटल से खाने-पीने के वीडियो निकालकर प्रचारित किए गए। होटल का बिल भी पब्लिक में लाया गया। और भक्तों द्वारा खुलकर प्रचार किया गया कि गलती उसी की थी। हर मामले में यही होता है। अभी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में भी उल्टे उन्हीं से सवाल पूछे जा रहे हैं। राक्षस (कालनेमी) तक कह दिया गया। मीडिया ने शंकराचार्य लिखना बंद कर दिया। स्वामी भी नहीं डायरेक्ट नाम।

पहले हर चीज के लिए सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, राहुल दोषी होते थे। मीडिया नाम ले लेकर इनसे सवाल करता था। मायावती और अखिलेश का भी यही हाल था। मगर अब कोई प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री का नाम नहीं ले सकता है। सारा दोष सिस्टम पर।

और नेहरू तो हैं ही। वैसे प्रधानमंत्री अभी जब सोमनाथ गए थे तो एक हजार साल पीछे चले गए थे। कह रहे थे उस सोच के लोग अब भी हैं। और उनके सुरक्षा सलाहकार ने तो खुलकर उसका बदला लेने की भी बात कर दी।

अमेरिका से कुछ बोल नहीं पा रहे। अरब देशों के शेखों को अपना भाई बताकर उन्हें लेने एयरपोर्ट जा रहे हैं। और यहां बदला लेने की बात कर रहे हैं। सारे दोष हजारों साल पहले के इतिहास से लेकर नेहरू और अब मिस्टर सिस्टम पर डाले जा रहे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it