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ललित सुरजन की कलम से व्यापम : कड़वे सच की परतें

'मध्यप्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल या कि व्यापम महाघोटाले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दिए जाने के बाद बहुत लोगों ने चैन की सांस ली होगी।

ललित सुरजन की कलम से व्यापम : कड़वे सच की परतें
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'मध्यप्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल या कि व्यापम महाघोटाले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दिए जाने के बाद बहुत लोगों ने चैन की सांस ली होगी। जिन राज्यपाल रामनरेश यादव के अब-तब में इस्तीफा देने या पदमुक्त किए जाने की चर्चाएं चल रही थीं उनके बारे में कहा जा रहा है वे शायद जांच पूरी होने या अपना कार्यकाल समाप्त होने तक अपनी जगह पर बने रहेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो स्पष्ट कहा है कि उनके सिर से भारी बोझ उतर गया है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को शायद इस बात की खुशी हो कि उनके दबाव बनाने के कारण ही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और जांच का काम राज्य सरकार की एजेंसी से लेकर केंद्रीय एजेंसी को दे दिया गया। इस अभूतपूर्व षड्यंत्र का पर्दाफाश जाने-अनजाने में जिन्होंने किया, वे भी अपनी सुरक्षा के प्रति अब आश्वस्त होंगे! आम जनता को भी संभवत: लग रहा हो कि अब न्याय होकर रहेगा। दूसरी ओर ऐसा सोचने वालों की भी कमी नहीं कि सीबीआई तो पिंजरे में कैद तोता है और जैसा केंद्र सरकार चाहेगी, उसकी जांच उसी दिशा में जाएगी। इस सिलसिले में भाई लोग याद भी दिलाते हैं कि एक समय शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे, इसलिए उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार से किसी सहानुभूति की अपेक्षा नहीं रखना चाहिए। कुछेक जन इसके आगे बढ़कर टीका करते हैं कि सुषमा, वसुंधरा, शिवराज सबके सब मोदी-विरोधी हैं।'

(देशबन्धु में 23 जुलाई 2015 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/07/blog-post_22.html


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