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ट्रंप ने कहा भारत को नरक मगर मोदी को चुनाव से फुरसत नहीं!

कभी कांग्रेस का केन्द्र सहित सभी राज्यों में राज था। कांग्रेसी कोई छोटा मोटा संस्थान भी छोड़ना नहीं चाहते थे।

ट्रंप ने कहा भारत को नरक मगर मोदी को चुनाव से फुरसत नहीं!
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शकील अख्तर

आज क्या हो रहा है? मोदी अमित शाह हर चुनाव जीतना चाहते हैं। किसी भी कीमत पर। बंगाल में सारी ताकत लगा दी है। चुनाव आयोग मीडिया बाकी संस्थाएं सब साथ हैं। बड़ी तादाद में केन्द्रीय सुरक्षा बल लेकर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो हफ्ते से बंगाल में डेरा जमाए बैठे हैं। बताया जा रहा है कि अभी 27 अप्रैल सोमवार जब दूसरे दौर के चुनाव प्रचार खतम नहीं हो जाता वे वहीं रहेंगे।

कभी कांग्रेस का केन्द्र सहित सभी राज्यों में राज था। कांग्रेसी कोई छोटा मोटा संस्थान भी छोड़ना नहीं चाहते थे। इन्दिरा गांधी से कहा गया कि यह जेएनयू का छात्रसंघ हमारे पास नहीं है। इन्दिराजी ने जवाब दिया कि कुछ विपक्ष के लिए भी छोड़ना चाहिए। कमलापति त्रिपाठी ने बनारस में अपने खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राजनारायण को चुनाव खर्चे के लिए पैसे दिए। 1980 के लोकसभा चुनाव की बात है। कई उदाहरण हैं और इनकी शुरूआत खुद नेहरू से होती है।

नेहरू के सबसे बड़े आलोचक लोहिया जो एक तरफ कहते थे कि अगर मुझे कु छ हो गया तो मेरी सबसे अच्छी देखभाल नेहरू के घर पर होगी और दूसरी तरफ वे नेहरू पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाते थे। ऐसे हवा हवाई आरोप जैसे आजकल प्रधानमंत्री मोदी लगाते हैं कि कांग्रेस के पास बोरों में भर-भर कर पैसा जाता है, 50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड! ऐसे ही उन दिनों 25 हजार रुपए बहुत होते थे। तो लोहिया ने आरोप लगाया कि नेहरू का व्यक्तिगत खर्च 25 हजार रुपए रोज है। और नेहरू ने इतने ही रुपए 25 हजार लोहिया के चुनाव खर्चें के लिए पहुंचाए। साथ में एक जीप और लोहिया चुनाव किस के खिलाफ लड़ रहे थे? खुद नेहरू के। 1962 का लोकसभा चुनाव। फुलपुर से। नेहरू को जीतना ही था।

लेकिन उन्होंने कहा कि लोहिया को लोकसभा में होना चाहिए। ऐसा ही वाजपेयी के लिए भी कहते थे। नेहरू से लेकर इन्दिरा, राजीव गांधी तक सब विपक्ष के नेता और विपक्ष की जगह का महत्व जानते थे और उसे बनाए रखने में मदद करते थे।

नेहरू ने 1962 की लोहिया की हार के बाद 1963 में उनको फर्रूखाबाद के उपचुनाव में जिताने में मदद भी की थी। राजीव गांधी का जिक्र किया तो यह इतनी बड़ी बात खुद राजीव ने कभी नहीं बताई वाजपेयी ने ही बताई थी कि जब राजीव गांधी को उनके हार्ट की गंभीर समस्या का मालूम पड़ा तो एक प्रतिनिधिमंडल का अध्यक्ष बनाकर अमेरिका भेजा और वहां इलाज की सारी व्यवस्था की। राजीव की हत्या के बाद वाजपेयी ने जब यह बात बताई तो सबको मालूम पड़ा।

मगर आज क्या हो रहा है? मोदी अमित शाह हर चुनाव जीतना चाहते हैं। किसी भी कीमत पर। बंगाल में सारी ताकत लगा दी है। चुनाव आयोग मीडिया बाकी संस्थाएं सब साथ हैं। बड़ी तादाद में केन्द्रीय सुरक्षा बल लेकर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो हफ्ते से बंगाल में डेरा जमाए बैठे हैं। बताया जा रहा है कि अभी 27 अप्रैल सोमवार जब दूसरे दौर के चुनाव प्रचार खतम नहीं हो जाता वे वहीं रहेंगे। इससे पहले कभी किसी राज्य के चुनाव में गृहमंत्री सारे काम छोड़कर एक राज्य में रहे ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। बाकी सब काम और समस्याएं तो एक तरफ हैं। मगर सीमवर्ती राज्य मणिपुर में तो बुरी तरह हिंसा की आग धधक रही है। मगर न प्रधानमंत्री न गृह मंत्री किसी को मणिपुर की चिंता है।

और बंगाल में केन्द्रीय सुरक्षा बल कितने हैं? करीब ढाई लाख से ज्यादा जवान। बंगाल पुलिस को एकदम किनारे कर दिया गया है। खुद गृह मंत्री अमित शाह एक वीडियो में कहते हुए सुने जा रहे हैं ऐ बंगाल पुलिस हट जाओ! कल को कोई नेता किसी दूसरे राज्य की पुलिस के लिए भी ऐसा ही कहेगा। और कोई राज्य का नेता केन्द्रीय सुरक्षा बल से भी कह सकता है। कैसा ट्रेंड सेट कर रहे हैं देश के गृहमंत्री?

और चुनाव आयोग क्या कर रहा है? वह राज्य की पुलिस के अपमान, गृह मंत्री, प्रधानमंत्री, यूपी के मुख्यमंत्री के बार-बार टीएमसी के गुंडे कहने से लेकर दीदी के गुंडे कहने पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा लेकिन बाइक पर आने जाने पर रोक लगा रहा है।

देश में खासतौर से गांवों में आने-जाने का सबसे मुख्य साधन क्या है? दोपहिया वाहन। उनके चलाने पर रोक लगा दी। मगर जब ज्यादा विरोध हुआ तो पीछे किसी को बिठाने पर रोक लगा दी। गांव का बाइक का हिसाब-किताब समझते हैं ये? एक आदमी बाइक पर जाता है तो महंगा पड़ता है। दो में किफायती और तीन में सस्ता। इस तरह हिसाब-किताब लगाकर गांव कस्बों में लोग अपना काम चलाते हैं। बड़े शहरों में सरकार कहती है गाड़ी पूल करो। मगर कोई नहीं मानता। लेकिन गांव, कस्बों में बिना किसी के कहे अपने आर्थिक हालात को देखकर लोग बाइक पूल करते हैं। पता नहीं कितना तो सामान इस पर आता-जाता है। मगर चुनाव आयोग कुछ नहीं देख रहा। पोलिंग के 48 घंटे पहले शराब की दुकानें बंद होती हैं। मगर बंगाल में 96 घंटे की शराबबंदी कर दी गई है।

मतलब वह सब काम किए जा रहे हैं जो कभी नहीं हुए। हर हाल में चुनाव जीतना है। जिताना है। लेकिन क्या यह जिद, सत्ता की भूख बंगाल तक ही है? अभी तो कई राज्य ऐसे हैं जहां भाजपा का कोई अता पता नहीं है! जैसे बंगाल के मिज़ाज से भाजपा का मेल नहीं खाता है। वैसे ही इन पांच राज्यों में जहां बंगाल के साथ चुनाव हो रहे हैं केरल और तमिलनाडु में भी भाजपा कहीं नहीं है। क्या अब ऐसा ही हर हाल में चुनाव जीतो अभियान उन सब जगह होगा जहां बीजेपी नहीं है?

ऐसे सारे राज्य सीमावर्ती हैं। लेकिन स्थिति की इस नजाकत को क्या बीजेपी समझती है? अब तो यह साफ हो गया है कि बीजेपी को चुनाव जीतने के अलावा और कोई काम नहीं है। और बीजेपी नहीं बीजेपी की केन्द्रीय सरकार को।

देश की विदेश की किसी बात से कोई मतलब नहीं। पहले मणिपुर के लोग कहते थे कि क्या हम देश में नहीं हैं? प्रधानमंत्री को हमारी चिंता ही नहीं! मगर अब तो खुद प्रधानमंत्री के लिए विदेश से क्या-क्या कहा जा रहा है उससे भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा। और उनके लिए क्या अब तो ट्रंप देश के लिए भी कहने लगा। नरक! जिसे महाकवि इकबाल ने कहा था- सारे जहां से अच्छा! लेकिन इन्हें तो इकबाल के नाम से भी प्राब्लम है तो जिन स्कूलों में गाया जाता था वहां बंद करवा दिया। और कुछ टीचरों के खिलाफ तो इसके लिए मुकदमे तक करवा दिए।

सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा लिखने वाले का विरोध और भारत को नर्क कहने वाले ट्रंप का ऐसा सम्मान की उसकी जीत के लिए हवन करवाए गए और खुद प्रधानमंत्री मोदी अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगाने लगे। लेकिन हमें नरक कहा तो चलो एक बार बर्दाश्त कर लेते मगर वे तो उससे भी आगे जाकर हमारे जख्मों पर और नमक छिड़क रहे हैं!

जिस पाकिस्तान को कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग थलग कर दिया था। उसे अब ट्रंप महान देश कहकर पुकार रहा है।

भारत के लिए इससे बड़ी तकलीफ की बात कोई और नहीं हो सकती। उसकी आतंकवादी गतिविधियों को दुनिया के सामने रखकर मनमोहन सिंह सरकार और उससे पहले कांग्रेस की ही नरसिंहा राव सरकार ने उसे फेल स्टेट, असफल देश के रूप में स्थापित कर दिया था। मगर अब वह अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करवा रहा है। ट्रंप वहां के प्रधानमंत्री के साथ वहां के उस आर्मी चीफ की तारीफ कर रहे हैं जो पहलगाम की आतंकवादी हत्याओं के लिए जिम्मेदार है।

लेकिन सही में प्रधानमंत्री मोदी को कोई मतलब नहीं। बस बंगाल चुनाव जीतना है। क्या हो जाएगा बंगाल जीतकर? और बंगाल ही क्या जो राज्य अभी तक नहीं जीते पंजाब, जम्मू कश्मीर, आंध्र, तेलंगाना और केरल एवं तमिलनाडु का जिक्र तो ऊपर किया वे सब भी जीत जाएं और विदेशों में ऐसी ही बेइज्जती होती रहे तो ऐसे पूरे भारत पर कब्जे का क्या मतलब?

जैसा शुरू में लिखा कांग्रेस जीतती थी तो दुनिया में देश का सम्मान करवाती थी। भारत की कीमत पर अपना राजनीतिक लाभ कभी नहीं देखती थी। लेकिन आज सिर्फ चुनाव चुनाव चुनाव! चुनाव जीतने के अलावा किसी और बात से कोई मतलब नहीं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)


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