ललित सुरजन की कलम से स्मार्ट सिटी का सपना-3
केन्द्र सरकार शहरी बसाहट के कुछ आदर्श प्रतिमान या मॉडल खड़े कर देना चाहती है जिससे अन्य नगरों को भी प्रेरणा मिल सके।

'स्मार्ट सिटी योजना के बारे में मैं जितना कुछ पढ़ सका हूं इससे अनुमान लगता है कि केन्द्र सरकार शहरी बसाहट के कुछ आदर्श प्रतिमान या मॉडल खड़े कर देना चाहती है जिससे अन्य नगरों को भी प्रेरणा मिल सके। भारत का जिस तेजी के साथ शहरीकरण हो रहा है उसमें इस योजना का औचित्य समझ में आता है। इसके अलावा केन्द्र द्वारा शहरी नवीकरण के लिए अमृत और हृदय जैसी योजनाएं भी प्रारंभ की जा रही हैं। किन्तु इन तमाम योजनाओं को अमल में लाने में सबसे बड़ी समस्या तो धनराशि की होनी है। अगर वर्ल्ड बैंक इत्यादि से ऋण लेकर राशि जुटा भी ली जाए तो उससे देश की ऋणग्रस्तता बढ़ेगी तथा कर्ज वापिस करने की तलवार सिर पर सदैव लटकती रहेगी। यह प्रश्न भी उठता है कि क्या हमारे नगरीय निकायों में ऐसी योजनाओं को लागू करने की आवश्यक योग्यता और क्षमता है? इन संभावनाओं को नहीं नकारा जा सकता कि विदेशी परामर्शदाताओं को बुलाए बिना काम पूरा नहीं होगा। ऐसी स्थिति में ऋण से प्राप्त राशि का एक बड़ा हिस्सा उन्हें फीस के रूप में वापिस चला जाएगा और ऋण अपनी जगह पर कायम रहा आएगा।Ó
(देशबन्धु में 11 फरवरी 2016 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/02/3.html


