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ललित सुरजन की कलम से सागौन के फूल और उदास नर्मदा

'प्रगतिशील लेखक संघ का कार्यक्रम तो घंटे-दो-घंटे का था, वह भी शाम के समय।

ललित सुरजन की कलम से सागौन के फूल और उदास नर्मदा
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'प्रगतिशील लेखक संघ का कार्यक्रम तो घंटे-दो-घंटे का था, वह भी शाम के समय। मैंने सोच रखा था कि दो दिन जबलपुर घूमने-फिरने में बिताऊंगा। जिस नवीन विद्या भवन में पांचवीं-छठवीं की पढ़ाई की वह भंवरताल उद्यान के पास ही है। मैं अपने स्कूल तक गया और साठ साल बाद उसके प्रांगण में कदम रखे। पहले जहां स्कूल परिसर में दोनों तरफ खपरैल वाले एक मंजिले भवन थे वहां अब पक्की तीन मंजिली इमारतें खड़ी हो गई हैं। एक विधि महाविद्यालय भी चलने लगा है। स्कूल का खेल का मैदान पहले की ही तरह सुरक्षित है और सबसे अच्छा यह लगा कि स्कूल प्रांगण में शापिंग काम्पलेक्स नहीं बनाया गया है। परिसर में एक खंड संस्थापक प्राचार्य किशोरीलाल पांडेय के नाम पर है। ध्यान आया कि उन्होंने अपने समय की अप्रतिम गायिका एम.एस. शुभलक्ष्मी का कार्यक्रम भवन निर्माण के लिए धन संग्रह हेतु कराया था और तब मुझे उन्हें सुनने का विरल सौभाग्य मिला था।'

(देशबन्धु में 24 सितम्बर 2015 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/09/blog-post_24.html


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