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सिकल सेल रोग: विश्व सिकल दिवस, सिकल सेल : समानता का हकदार

चिकित्सा विज्ञान की प्रगति से मालूम हुआ कि यह विकृति भारत, अरब, और मेडीटेरियन अफ्रीका के अन्य देशों में भी व्याप्त है।

सिकल सेल रोग: विश्व सिकल दिवस, सिकल सेल : समानता का हकदार
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  • डॉ.ए.आर.दल्ला

प्रति वर्ष 19 जून को विश्व सिकल दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष 2026 के लिए एक थीम चर्चा का विषय दी है-'जीवन रक्षा की खाई को भरें सिकल सेल पर समानता सुनिश्चित करें।' यह दिन जीवन के प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार लाने और बेहतर सुविधाओं की वकालत करने का एक वैश्विक अभियान भी है।

पहले इसे सिर्फ अश्वेत अफ्रीकन (नीग्रो) लोगों का रोग माना जाता था। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति से मालूम हुआ कि यह विकृति भारत, अरब, और मेडीटेरियन अफ्रीका के अन्य देशों में भी व्याप्त है। रोजी-रोटी की तलाश में जाने वाले प्रवासी अश्वेत नीग्रों के माध्यम से यह रोग अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों में भी पहुंचा।

यहां यह जानना जरूरी है कि विश्व के विकसित और विकासशील देशों में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में बहुत अंतर है- इसमें आर्थिक संसाधनों की एक बड़ी कमी की समस्या भी सामने आती है। इसी संदर्भ में इस वर्ष 2026 में विश्व-स्वास्थ संगठन ने एक सामायिक थीम दी है- 'जीवन रक्षा की खाई को भरें। समानता सुनिश्चित करें।'

विश्व सिकल दिवस के अवसर विश्व समुदाय एकजुट होकर लाखों सिकल ग्रसित परिवारों को संबल प्रदान करता है-जो इस अनुवांशिक व्याधि से व्यथित है। संयुक्त राष्ट्र संगठन ने विशेष रूप से कहता है कि सभी प्रभावित देशों एवं पंजीकृत सेवा संस्थाओं को एकजुट होकर सिकल रोग पर जन-चेतना का प्रसार और इलाज का प्रयास करना होगा। हमें सब मिलकर अनुसंधान, नवाचार और आवश्यक वित्तीय सहायता को बढ़ावा देना होगा।

भारतवर्ष में सिकल सेल-वर्ष 1952 तक भारतवर्ष में इस बीमारी पर जानकारी का अभाव था। समय के साथ ज्ञात हुआ कि भारत के कुछ प्रदेशों के आदिवासी पिछड़े और वंचित लोगों का एक बड़ा वर्ग इस अनुवांशिक व्याधि से प्रभावित है।

यहां यह बतलाना आवश्यक है कि विकसित और विकासशील देशों में स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक बजट में एक बहुत बड़ा अन्तर है। हमें एकजुट होकर सिकल रोग से व्याधित व्यक्तियों के परिवारों को संबल और सहायता पहुंचाना है। जो इस वंशानुगत रक्त विकार के साथ जी रहे हैं। वर्ष 2026 का विश्व सिकल दिवस का दिन सिर्फ जनजागरण का दिन नही हैं बल्कि जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और बेहतर सुविधाओं की वकालत के लिए एक वैश्विक अभियान भी है।

छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के साथ ही राज्य में सिकल सेल व्याधि पर संज्ञान लिया गया। छत्तीसगढ़ की विधानसभा में वर्ष 2008 को सर्वसम्मति से सिकल सेल विकृति पर नियंत्रण का संकल्प भी सर्वसम्मति से पास हुआ। रायपुर में सिकल सेल रोग पर एक अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस के आयोजन में विश्व का ध्यान आकर्षित करने का प्रस्ताव पारित कर भारत के महामहिम राष्ट्रपति को सौंपा गया।

भारत में राष्ट्रीय स्तर पर सिकल कार्यों को प्रगति तब मिली जब भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसका संज्ञान लिया। विगत वर्ष सिकल सेल विकृति की रोकथाम के लिये 'मिशन मोडÓ पर वृहत प्रयास का प्रारंभ करते हुये, आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने मध्यप्रदेश के शहडोल में एक विशेष 'सिकल नियंत्रण केन्द्रÓ की स्थापना की। प्रारंभिक तौर पर यह भारतवर्ष के 17 प्रभावित राज्य के 275 जिलों के आदिवासी क्षेत्रों में सिकल रोग सर्वेक्षण रोकथाम एव जनजागरण का प्रयास मिशन मोड में करेगा।

प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल व्याधि के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। आइए, हम सब मिलकर अनुसंधान, नवाचार, और आवश्यक वित्तीय सहायता को बढ़ावा देने का प्रयास करें ताकि प्रत्येक रोगी को वह गुणवत्ता पूर्ण देखभाल और उपचार मिल सके- जिसका वह हकदार है।

(लेखक पूर्व अध्यक्ष, प्रोजेक्ट सिकल छत्तीसगढ़ एवं पूर्व चेयरमेन भारतीय रेड क्रास सोयायटी)


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