Top
Begin typing your search above and press return to search.

ललित सुरजन की कलम से रामचन्द्र सिंहदेव: विरल कोटि के व्यक्ति -1

'मेरे आग्रह पर उन्होंने अपने राजनीतिक संस्मरण लिखना प्रारंभ किया था।

ललित सुरजन की कलम से रामचन्द्र सिंहदेव: विरल कोटि के व्यक्ति -1
X

'रामचन्द्र सिंहदेव तब भी अपनी तरह के अलग राजनेता थे जैसे कि वे अंत तक बने रहे। उन्होंने राजमहल में जन्म लिया, लेकिन राजसी ठाट-बाट कभी नहीं अपनाया। वे चुनावी राजनीति के दांवपेंच बखूबी समझते थे, लेकिन स्वयं चुनाव लड़ने के लिए अनीति का आश्रय नहीं लिया। जिस दिन लगा कि अपनी शर्तों पर राजनीति करना कठिन हो गया है उस दिन चुनावी राजनीति से सन्यास ले लिया। उन्होंने राजसत्ता को करीब से देखा, महत्वपूर्ण ओहदे संभाले लेकिन सत्ता के अहंकार को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।'

'मेरे आग्रह पर उन्होंने अपने राजनीतिक संस्मरण लिखना प्रारंभ किया था। उन्होंने सात मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया और हरेक के कार्यकाल के बारे में रोचक संस्मरण लिखे। मैंने उनसे कहा कि आपने हरेक के बारे में अच्छी-अच्छी बातें ही लिखीं हैं, लेकिन यह तो अधूरा सच हुआ, आप अपने पूरे अनुभव क्यों नहीं लिखते।

इस पर भी उनका सहज उत्तर था- मैंने जिनके साथ काम किया है उनकी बुराई नहीं लिखूंगा। जो व्यक्ति छह बार विधायक चुना गया हो, मंत्रिमंडल में जिसने महत्वपूर्ण विभाग संभाले हों, उसके पास तो शासन की और अपने नेता की राई रत्ती खबर रहती होगी। लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रागद्वेष से ऊपर उठकर व्यापक लोकहित के बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित रखना बेहतर समझा। जिस मुख्यमंत्री ने उन्हें चुनाव में हराने के लिए पूरी कोशिश की उसकी भी सार्वजनिक आलोचना उन्होंने नहीं की। उनका यही उदात्त स्वभाव था जो उन्हें समकालीन राजनेताओं से अलग कर देता था।'

(देशबन्धु में 26 जुलाई 2018 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2018/07/1.html


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it