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एक हाथ से ताली नहीं बजती

'भाजपा कुछ भी हो देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास व्यूह रचने वालों की कमी नहीं है।

एक हाथ से ताली नहीं बजती
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'भाजपा कुछ भी हो देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास व्यूह रचने वालों की कमी नहीं है। इसलिए यूपीए-2 का एक साल बीतते न बीतते भाजपा ने एक नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया। एक ओर जहां उन्होंने कांग्रेस व मनमोहन सरकार पर आरोप लगाना जारी रखा, वहीं दूसरी ओर देशी कारपोरेट घरानों व एनआरआई के साधनों से मदद लेकर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली पर कब्जा करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया। भाजपा के पास यद्यपि राष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्राप्त वरिष्ठ नेताओं की कमी नहीं थी, लेकिन नरेन्द्र मोदी पर दांव इसलिए लगाया गया कि कारपोरेट घरानों का सहयोग उनके नाम पर ही सबसे यादा मिल सकता था। यह सब जानते हैं कि उद्योगपति या व्यापारी का पूरा ध्यान मुनाफा कमाने पर रहता है, उसे इसके अलावा और किसी बात से मतलब नहीं रहता। इसलिए वे देश के नेता के रूप में हमेशा ऐसे व्यक्ति को चाहते हैं जो नीति-अनीति की अधिक परवाह किए बिना फौरी निर्णय ले सके।Ó

(देशबन्धु में 24 अक्टूबर 2013 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2013/10/blog-post_23.html


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